केदारनाथ अग्रवाल की किसानी कवि होने की झलकियां

केदारनाथ अग्रवाल जी के सामाजिक दृष्टि पुख्ता होने की झलक और प्रकृति प्रेम की झलक आपने पढ़ी होगी। यहाँ पर उनके किसानी कवि होने की झलक पढ़िए। 

केदारनाथ अग्रवाल जी की सामाजिक दृष्टि की झलकियां

Kedarnath Agrawal – केदारनाथ अग्रवाल के प्रकृति प्रेम की झलकियां

केदारनाथ अग्रवाल की किसानी कवि होने की झलकियां

1. कहा था ना कि केदारनाथ अग्रवाल जी कि कविताओं में किसानों से related बहुत कुछ मिलेगा तो यहाँ पर उन्होंने किसानी की importance बताते हुए कहा है –

नहीं कृष्ण की, 
नहीं राम की,
नहीं भीम, सहदेव, नकुल की,
नहीं पार्थ की,
नहीं राव की, नहीं रंक की..
नहीं तेग, तलवार, धर्म की
नहीं किसी की, नहीं किसी की
घरती है केवल किसान की।

यह धरती है उस किसान की,
जो मिट्टी का पूर्ण पारखी,
जो मिट्टी के संग साथ ही,
तपकर,
गलकर,
जीकर,
मरकर.
खपा रहा है जीवन अपना,
देख रहा है मिट्टी में सोने का सपना;

2.किसानी कवि की image को और पुख्ता करते हुए इन्होंने देवताओं के हाथों में तक हल और हंसिया पकड़ा दिया। ये हिम्मत कहीं और देखने को शायद नहीं मिलेगी –

स्वप्न के जो देव हैं 
औ' स्वप्न की जो देवियाँ है,
हाथ में हल और हँसिया को थमा कर,
मैं उन्हें मजबूर करता है
कि जोतो और काटो
पेट की पहली समस्या को मिटाओ।

3.केदारनाथ जी गाँव के परिवेश में थे और उसी से उन्हे प्रेम भी था। गाँव की मेहनत को दर्शाते हुए उन्होंने कहा है –

हाथ जो, 
चट्टान को तोड़े नहीं,
वह टूट जाये;
लौह को मोड़े नहीं,
सौ तार को जोड़े नहीं,
वह टूट जाए!

4.अपने गाँव की हर चीज से प्रेम यहाँ पर दिखता है , आपने कभी धूल को इस नजर से नहीं देखा होगा –

लिपट गयी हो धूल पाँव से 
वह गोरी है इसी गांव की
जिसे उठाया नहीं किसी ने
इस कुठाँव से।

5.ये प्रकृति और मनुष्य के संबंधों को दर्शाने का अब तक सबसे सुंदर चित्र है (मेरी नजर में)

आग लेने गया है 
पेड़ का हाथ आदमी के लिए
टूटी डाल नहीं टूटी।

6.जुझारूपन की एक और झलक –

न टूटो तुम 
बस झुको यों
कि चूम लो मिट्टी
और फिर उठो।

7.ये कविता आज के समय में किसानों के मरने पर बहुत सटीक बैठती है। कि कुछ भी हो, जज्बा नहीं तोड़ सकते –

जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है, 
तूफानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है,
जिसने सोने को खोदा, लोहा मोड़ा है,
जो रवि के रथ का घोड़ा है,
वह जन मारे नहीं मरेगा,
नहीं मरेगा!!

 

तो ये थी केदारनाथ अग्रवाल जी की किसानी जीवन से जुड़ी कविताओं की झलकियां। और पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ –

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बाकी पढ़ते रहिए। 

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