रघुवीर सहाय की निशब्द कर देनी वाली TOP - 5 कविताओं के अंश ( पार्ट - 2 )

रघुवीर सहाय जी का परिचय आपको पिछले ब्लॉग पोस्ट में बताया था फिर भी अगर आपने अब तक नहीं पढ़ा है तो यहाँ से पढ़िए। 

Raghuvir Sahay की TOP 3  कविताओं  के अंश (पार्ट -1)

अभी हाल ही हमने रघुवीर सहाय जी की कविताओं का मिक्स्ड कलेक्शन पढ़ा तो उसमें से चुन के आपके लिए कुछ ऐसी कवितायेँ लाये हैं जो आपको निशब्द (शब्द रहित या मौन ) कर देंगी मतलब आप कुछ देर के लिए अवाक् रह जायेंगे।

उनके लिखने का तरीका इतना अद्धभुत है कि आप उनकी सामाजिक समझ और व्यंग के कायल हो जायेंगे। ये कविताएँ ऐसी हैं जो बड़े सहज तरीके से समाज की बुरी व्यवस्था और नीतियों पर व्यंग (sarcasm) के रूप में सवाल करती हैं और आपके पास उनका कोई उत्तर नहीं होता, आप बस मौन रह जाते हैं।

उनके लेखन का प्रभाव कुछ ऐसा होगा कि कई बार आपको गुस्सा भी आएगा, आप छटपटायेंगे भी अपने समाज का ये रूप आईने में देखकर।

हमने इन कविताओं में अपना कोई व्यू इसलये नहीं दिया क्यूंकि शायद अभी हम इस काबिल हुए ही नहीं हैं। तो आइये पढ़ते हैं- 

रघुवीर सहाय की निशब्द कर देने वाली Top 5 कविताओं के अंश  

आमने सामने बैठे थे
रामदास मनुष्य और मानवेन्द्र मंत्री
रामदास बोले आप लोगों को मार क्यों रहे हैं ?
मानवेन्द्र भौंचके सुनते रहे
थोड़ी देर बाद रामदास को लगा
कि मंत्री कुछ समझ नहीं पा रहे हैं
और उसने निडर होकर कहा
आप जनता की जान नहीं ले सकते
सहसा बहुत से सिपाही वहाँ आ गए

( कविता – प्रश्न ) 

आपकी सहूलियत के लीयते बस इतना कहूंगा की दूसरी लाइन बार बार पढ़िए जब तक समझ न आये। 


प्राकृतिक इलाज इस गरीबी में असंभव था-
महँगी दवाओं के विष से वह मर गया

( कविता -दयावती का कुनवा )

सब पर एक सवाल ?


बच्चा गोद में लिए
चलती बस में
चढ़ती स्त्री
और मुझमें कुछ दूर तक घिसटता जाता हुआ।

( कविता – चढ़ती स्त्री )

यात्रा में घर से निकलते ही एक सुख होता है
और शहर छोड़ते ही पश्चाताप एक

( कविता – लोग भूल गए हैं )

जरूर पढ़िए, ढूँढ के पढ़िए। 


लोग या तो कृपा करते हैं या खुशामद करते हैं
लोग या तो ईर्ष्या करते हैं या चुगली खाते हैं
लोग या तो शिष्टाचार करते हैं या खिसियाते हैं
लोग या तो पश्चात्ताप करते हैं या घिघियाते हैं
न कोई तारीफ़ करता है न कोई बुराई करता है
न कोई हँसता है न कोई रोता है
न कोई प्यार करता है न कोई नफरत
लोग या तो दया करते हैं या घमण्ड
दुनिया एक फँफुदियायी हुई-चीज़ हो गयी है।

( कविता- दुनिया )

Google करेंगे तो मिल जाएगी, दुनियां को हक़ीक़त की नज़र से देखना है तो ज़रूर पढ़ें, दुःख होगा पर तृप्ति भी होगी। 


 तो ये थीं हमारी समझ से चुनी गयी सहाय जी की निश्ब्द कर देने वाली 5 कविताओं के अंश आपका क्या मत और विचार हमें जरूर बताएं। 

Also: रघुवीर सहाय की निशब्द कर देनी वाली TOP – 5 कविताओं के अंश

Raghuvir Sahai- रघुवीर सहाय की TOP 3 कवितायेँ पार्ट -2

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