Abandoned Fragments - Franz Kafka | अधूरी सुंदर है

there is a coming and a going
a parting and often no-homecoming

Franz Kafka

अधूरी कहानियाँ, अधूरी लाईने, अधूरे thoughts – infact वो सब चीजें जो मन में आईं और लिखी गई और फिर छोड़ दी गईं – वो कभी कभी इतनी सुंदर और mysterious हो जाती हैं कि बहुत भीतर तक असर करती हैं। Abandoned Fragments वही है।

ये Franz Kafka के 1897 से 1917 तक के लिखाई के वो टुकड़े हैं जो कभी publish नहीं हुए। और सबसे अच्छी बात – ये unedited हैं। मतलब जैसा वो लिख कर गए थे वैसा ही। इनमे से बहुत सी चीजें कहानियाँ बनीं, नॉवेल बनी, कुछ journals में चली गईं और बची हुई छोड़ दी गईं।

What is it, then, that you act as though you were real.

Franz Kafka

एक तो पढ़ के लगता है कि भाईसाहब ये आदमी क्या अलग ही लेवल का imagine करता था। एक कहानी है जिसमे एक आदमी को अकेलापन महसूस होता है तो उसी दिन उसके दरवाजे पर दो गेंद आ जाती हैं कूदती हुई और वो कूदते हुए उसका पीछा करती रहती हैं। उनसे पीछा छुड़ाने के लिए वो उन्हे cupboard में बंद कर देता है।

एक ऐसे ही अधूरी कहानी है जिसमे एक Ape इंसानों से बात कर रहा है।

एक कहानी में एक आदमी पुल है और और वो दो किनारों को जोड़े हुए है और जब उस पर से एक दूसरा आदमी गुज़रता है तो वो उसे देखने के लिए पीछे मुड़ता है और टूटता है।

In the evening no one who lives alone bears responsibility.

Franz Kafka

एक कहानी में एक आदमी एक चिड़िया पर बैठकर पहाड़ पर जाना चाहता है तो वो उसे पकड़कर उसको पेन की तरह इस्तेमाल करते हुए उसे पहले इंक में डुबोता है फिर उससे लिखता है कि चिड़िया permission दे रही है उसपर सवारी करने की।

और बहुत सी ऐसी कहानियाँ हैं जो शुरू की, फिर कुछ दिन छोड़ीं, फिर दोबारा शुरू की सुधार के साथ और फिर छोड़ दीं। The Trial अगर किसी ने पढ़ी है तो उसे उसके कुछ अंश यहाँ मिलेंगे। और वो बहुत गज़ब है पढ़ना – कि ऐसे शुरू हुआ था idea जिसने फिर The Trial का रूप लिया।

Little soul
you leap in dance
lay your head in balmy air
you lift your feet from glistening grass
blowing in the breeze in gentle stirs

Franz Kafka

मुझे personally ऐसी चीजें पढ़ना बहुत पसंद है और Franz Kafka ने अगर कुछ लिखा हो तो वो तो ग़ज़ब ही है बिल्कुल। मुझे पढ़ के बहुत मजा आया। कुछ बहुत raw पर at the same time कुछ बहुत profound मिला है – जो दिखाता है कि ये बंदा अपने समय के हिसाब से कहीं और ही सोचता था।

हर कहानी में, हर लिखाई में कुछ है जो इस दुनिया से परे है। जो अद्भुत है और बहुत भीतर तक कुरेदेगा।

तो अगर कुछ बहुत अच्छा पढ़ना है जो अधूरा है पर आत्मा कुरेद देगा तो Abandoned Fragments पढ़ें।

इसके कुछ excerpts शेयर कर रहा हूँ।

तब तक पढ़ते रहिए।

P.S. किताब के कवर पर Edward Munch की पेंटिंग The Scream लगाई गई है। वही इस पोस्ट की कवर फोटो है।

Franz Kafka की किताब Abandoned Fragments से कुछ Quotes

I always think that things used to live but are now fading. I always, my dear sir, have this gnawing desire to see things the way they present themselves before they reveal themselves to me. That’s when they must be beautiful and calm.

The present, half-past insecurity elevates the rising passion, and the passion boosts the insecurity. Insecurity continually arises anew, enclosing both and us.

it happens that a slight and unnoticed, always existent desire almost wishes to escape with increasing attention and feels held in its due place by a soon-to-emerge reality

that which one admires in a friend, for example, one does not so much admire in the friend but in the fellow human, and that friendship then must begin deep there, underneath all differences

that which one admires in a friend, for example, one does not so much admire in the friend but in the fellow human, and that friendship then must begin deep there, underneath all differences

Tell me, what do beautiful eyes look like, don’t you think that the eye itself cannot be beautiful after all? Is it the gaze? I’ve never found eyes beautiful.

I was stiff and cold; I was a bridge, I lay over an abyss: the tips of my toes over here, my hands dug in over there, I had clamped myself tight into crumbling loam. My coattails were streaming at my sides. In the depths roared the icy trout stream. No tourist strayed to this impassable height; the bridge was not yet marked on the maps. –So I lay waiting; I had to wait.

The world – F. is only its representative – and my Ego tear my body apart in an insoluble conflict.

Whatever I touch, decomposes


 Read Also : E-Magazine

एक चिथड़ा सुख – निर्मल वर्मा | बारिश, दिल्ली, सुख और चमत्कार सा कुछ

Don't miss out!
Subscribe To Newsletter

Receive top books recommendations, quotes, film recommendations and more of literature.

Invalid email address

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.

One Comment