फिल्म हिन्दी

Dekalog : Krzysztof Kieślowski | Life Changing, Mesmerizing, Otherworldy

चुप्पी का सबसे सुंदर रूप सोचो : फिर सोचो कुछ उससे भी ज्यादा सुंदर : सोचो, हर व्यक्ति सवालों के घेरे में लड़कर जीता है : जानो, चक्रव्यूह में फंसा अभिमन्यु सिर्फ महाभारत में ही नहीं होता: हर कोई अभिमन्यु है अपने जीवन का : ईश्वर रणभूमि में होकर भी तुम्हारे युद्ध में हस्तछेप नहीं करते : वो बस देखते हैं तुम्हारी कर्मठता और तुम्हारे चुनाव।

कहानी हिन्दी

The Hitchhiker’s Guide to the Galaxy Quotes

“The argument goes something like this: ‘I refuse to prove that I exist,’ says God, ‘for proof denies faith, and without faith I am nothing.'”
“‘But,’ says Man, ‘The Babel fish is a dead giveaway, isn’t it? It could not have evolved by chance. It proves you exist, and so, therefore, by your own arguments, you don’t. QED.'”
“‘Oh dear,’ says God, ‘I hadn’t thought of that,’ and promptly vanished in a puff of logic.”

कहानी हिन्दी

एक चिथड़ा सुख – निर्मल वर्मा | बारिश, दिल्ली, सुख और चमत्कार सा कुछ

कहीं जाने के लिए टिकट का होना जरूरी है; वह एक तरह का सिग्नल है जैसे घड़ी का होना, डायरी का होना, कैलंडर का होना – वरना एक रात हमेशा के लिए एक रात रहेगी, एक शहर हमेशा के लिए एक शहर, एक मृत्यु हमेशा के लिए एक मृत्यु;

फिल्म हिन्दी

Bhonsle | This film is about us

बहुत सुंदर और बहुत जरूरी फिल्म है – भोंसले। शुरुआत में धीमी लग सकती है अगर ऐसे सिनेमा की आदत नहीं है पर तब भी प्लीज देखो- ये फिल्म आने वाले सालों में जो भीतर कुरेदेगी वो बेहद जरूरी है। और हाँ फिल्म देखते हुए घुटन महसूस होगी क्यूंकि director ने cinematography का use intentionally वैसा किया है।

कविता हिन्दी

रघुवीर सहाय की निशब्द कर देनी वाली TOP – 5 कविताओं के अंश ( पार्ट – 2 )

लोग या तो कृपा करते हैं या खुशामद करते हैं
लोग या तो ईर्ष्या करते हैं या चुगली खाते हैं
लोग या तो शिष्टाचार करते हैं या खिसियाते हैं
लोग या तो पश्चात्ताप करते हैं या घिघियाते हैं
न कोई तारीफ़ करता है न कोई बुराई करता है
न कोई हँसता है न कोई रोता है
न कोई प्यार करता है न कोई नफरत
लोग या तो दया करते हैं या घमण्ड
दुनिया एक फँफुदियायी हुई-चीज़ हो गयी है।

Books कहानी नाटक हिन्दी

तीन एकांत – निर्मल वर्मा | एकांत का सुख है

कभी-कभी मैं सोचती हूँ कि मरने से पहले हममे से हर एक को यह छूट मिलनी चाहिए कि हम अपनी चीर-फाड़ खुद कर सकें। अपने अतीत की तहों को प्याज़ के छिलकों की तरह एक-एक करके उतारते जाएँ – आपको हैरानी होगी कि सब लोग अपना-अपना हिस्सा लेने आ पहुचेंगे, माँ-बाप, दोस्त, पति – सारे छिलके दूसरों के, आखीर की सुखी डंठल आपके हाथ मे रह जाएगी, जो किसी काम की नहीं, जिसे मृत्यु के बाद जला दिया जाता है, या मिट्टी के नीचे दबा दिया जाता है।