top 10 कविता हिन्दी

Kunwar Narain | कुँवर नारायण | Top 10 सुंदर पंक्तियाँ

नहीं चाहिए तुम्हारा यह आश्वासन
जो केवल हिंसा से अपने को सिद्ध कर सकता है।
नहीं चाहिए वह विश्वास, जिसकी चरम परिणति हत्या हो।
मैं अपनी अनास्था में अधिक सहिष्णु हूँ।
अपनी नास्तिकता में अधिक धार्मिक।
अपने अकेलेपन में अधिक मुक्त।
अपनी उदासी में अधिक उदार।
– kunwar narain

कविता हिन्दी

Raghuvir Sahay की TOP 3  कविताओं  के अंश (पार्ट -1)

जैसे गरीब पर किसी ताकतवर की मार 
जहाँ कोई कुछ कर नहीं सकता 
उस गरीब के सिवाय 
और वह भी अक्सर हँसता है 
हँसो हँसो जल्दी हँसो 
इसके पहले कि वह चले जायें 
उनसे हाथ मिलाते हुए 
नज़रें नीची किये 
उनको याद दिलाते हुए हँसो 
कि तुम कल भी हँसे थे। 

Books कविता हिन्दी

Kedarnath Singh | केदारनाथ सिंह की कविताओं के अंश

मैं पूरी ताक़त के साथ
शब्दों को फेकना चाहता हूँ आदमी की तरफ
यह जानते हुए कि आदमी का कुछ नहीं होगा
मैं भारी सड़क पर सुनना चाहता हूँ वह धमाका
जो शब्द और आदमी की टक्कर से पैदा होता है
– केदारनाथ सिंह

Books review | समीक्षा top 10 कविता हिन्दी

Gulzar – Triveni | The best among best

हमारे समाज की भद्दी तस्वीर को उज़ागर करता और हम खुद के अंदर झांकने को मजबूर करता है ये त्रिवेणी

चूड़ी के टुकड़े थे, पैर में चुभते ही खून बह निकला
नंगे पाँव खेल रहा था, लड़का अपने आँगन में

बाप ने कल फिर दारू पी के माँ की बाँह मरोड़ी थी।

Books कविता हिन्दी

विनोद कुमार शुक्ल- कविता से लंबी कविता | Review | Top 10 बिम्ब

पाँच मिनट बाद खिड़की खोलने पर
वही खड़ा हुआ दृश्य,
खड़े हुए दृश्य में
गुजरते हुए लोग
कि उस पेड़ के पास
अब कोई आदमी नहीं
जैसे वह जान-बूझकर पेड़ छोड़कर
चला गया कहीं

Books कविता हिन्दी

केदारनाथ अग्रवाल जी की सामाजिक दृष्टि की झलकियां

केदारनाथ अग्रवाल जी हिन्दी साहित्य के कुछ सबसे सुंदर कृतियों वाले कवियों में से एक हैं। इनकी कविताओं में प्रकृति का जो विवरण होता है वो बहुत सुंदर है। बहुत से लेखकों ने उन्हे किसानी कवि की पदवी भी दी है।

Books review | समीक्षा top 10 कविता हिन्दी

विनोद कुमार शुक्ल- कविता से लंबी कविता | Review | पढ़ने के Top 10 कारण

गीत चतुर्वेदी जी ने अपने interview में कहा है कि विनोद कुमार शुक्ल हवा में सरलता से चलने वाले कवि हैं और व्योमेश शुक्ल ने लिखा है – “ज़िंदगी कितनी कम विनोद कुमार शुक्ल है।” और फिर आप जब एक बार इनके संसार में कदम रखते हैं तो आप जमीन से दो इंच ऊपर ही चलेंगे। अभी- अभी विनोद कुमार शुक्ल जी की किताब कविता से लंबी कविता  किताब पढ़ी है और इस समय जिस zone में हूँ उसको केवल विनोद कुमार शुक्ल के संसार को जानने वाला ही समझ सकता है।