Kedarnath Singh | केदारनाथ सिंह की कविताओं के अंश

Kedarnath Singh – केदारनाथ सिंह हिन्दी कविता में पूजे जाते हैं। उनकी भाषा में एक अलग ही सुंदरता है जो आप महसूस करते हैं तो लगता है – कि हाँ यार कुछ पढ़ा है। 

केदारनाथ सिंह जी की किताब – पचास कविताएँ (नई सदी के लिए चयन) पढ़ी है और उसमें वैसे तो बहुत कुछ underline किया पर साथ में कुछ चीजें साझा भी करना चाहीं। 

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तो वही पेश हैं –

Kedarnath Singh जी की कुछ चयनित पंक्तियाँ 

मैं पूरी ताक़त के साथ 
शब्दों को फेकना चाहता हूँ आदमी की तरफ
यह जानते हुए कि आदमी का कुछ नहीं होगा
मैं भारी सड़क पर सुनना चाहता हूँ वह धमाका
जो शब्द और आदमी की टक्कर से पैदा होता है

ये lines सबसे पहले मानव कौल के instagram की स्टोरी पर पढ़ी थीं और तब ढूंढा था कि ये आदमी कौन है जिसने ये शब्द लिखे हैं। तब पता चल इनका नाम केदारनाथ सिंह है और क्या ग़ज़ब बात लिखी है।  

जो मेरे नहीं हैं 
आखिर वे भी तो मेरे ही हैं
चाहे जहाँ भी रहते हों
फिर क्यूँ यह ज़िद
कि यही-यही
सिर्फ़ यही मेरा घर है?

जब जमीन और आसमान तक का बंटवारा चल रहा है उस व्यक्त ये शब्द पढ़ने पर कुछ अलग महसूस नहीं होता क्या?

जितनी वह चुप थी 
बस उतनी ही भाषा
बची थी मेरे पास
बस उतना ही अनंत मेरी झोली में था
जितना जल्दी-जल्दी
ढल रहा था दिन।

चुप्पी प्रेम की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति होती है – ऐसा पढ़ा है कहीं! और प्रेम में भाषा का इस्तेमाल कैसे हो – ये पढ़ के समझ आता है। 

कौन कह सकता था 
कि ऐसे भी आ सकती है मृत्यु
जैसे आते हैं पक्षी...

हम में से mostly लोगों ने तो सोचा ही होगा कि मृत्यु आएगी तो कैसे आएगी! नहीं सोचा है तो सोच कर देखिएगा, एक अलग ही आनंद आएगा। और उसमें अगर आपको कहीं ऐसी मृत्यु के बारे में पता चले तो क्या कहेंगे?

हमारे देश में नदियां 
जब कुछ नहीं करतीं
तब वे शवों का इंतज़ार करती हैं।

इसके बारे में बोलने के लिए कुछ नहीं है। जो भी यहाँ रहते हैं वो पढे और जाने। और समझें। 

इस समय मेरी जिह्वा पर 
जो एक विराट झूठ है
वही है - वही है मेरी सदी का
सब से बड़ा सच !

झूठ और सच के बीच की दीवार कहाँ पर धूमिल होती है!

हो सकता है तुम अपने शहर में घुसो
और तुम्हें लगे कि शहर
एक स्त्री की अनुपस्थिति का दूसरा नाम है

कभी किसी से प्रेम तो किया ही होगा, उस प्रेम के ना होने से शहर कैसा महसूस होता है?

और समय था कि आराम से पड़ा रहता था 
लोगों के कंधों पर
एक गमछे की तरह !

और यहाँ पर मैं निशब्द हूँ।


तो ये थी Kedarnath Singh जी की कुछ पंक्तियाँ जो किताब – पचास कविताएँ (नई सदी के लिए चयन) से थीं। 

अगर किताब खरीदना चाहें तो नीचे लिंक से ले सकते हैं। 

पचास कविताएँ (नई सदी के लिए चयन) – Kedarnath Singh

तब तक पढ़ते रहिए। 

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