इस फ़िल्म में मेरी तीन सबसे प्रिय अभिनेत्रियाँ हैं जिन्होंने बहुत अहम किरदार निभाए हैं- Kalki Keochlin, Sayani Gupta, Revathi. कहानी Laila(Kalki) की ज़िंदगी की है जो कि Cerebral Palsy से ग्रसित है। उसके परिवार में उसके पिता, उसकी माँ(Revathi) और उसका भाई भी है। Laila दिल्ली में college पढ़ती है, उसे music बहुत पसंद है और वो अपने college के music band में lyricist का काम भी करती है।

कहानी शुरुआत से ही Laila की sexual और emotional needs को बड़ी ही सहजता से explore करती है। पूरी कहानी में हम जगह जगह पर देखते हैं कि कैसे लोग और समाज laila को perceive करते हैं, उनके दिमाग में उसे देखते ही एक दया का बुलबुला सा उड़ने लगता है। वो उसकी काबिलीयत के बावजूद भी उसकी condition की वजह से उसे sympathy में सारा appreciation दे देते हैं या फ़िर कभी वो surprise हो जाते हैं उसके जीवन के किस्से सुनकर क्योंकि उन्होंने उसे underestimate करके बेचारा समझा था।

Laila के आस पास के इस माहौल से उसके मन पर बहुत असर पड़ता है। वो बाकी सब की तरह ही जीवन को भरपूर जीना चाहती है, प्यार करना चाहती है बिल्कुल normal लोगों की तरह। उसका किरदार है भी ऐसा जो अपनी feelings को लेकर बहुत expressive है, अगर उसे कोई पसन्द है तो वो बेझिझक कह देती है।

कहानी आगे बढ़ती है तो पता चलता है कि Laila को New York University में पढ़ने के लिए चुन लिया गया है। उसकी माँ उसे बाहर भेजना चाहती थी क्योंकि वो अपनी बेटी की काबिलीयत सबको दिखाना चाहती थी। Laila और उसकी माँ का बहुत ही सुंदर रिश्ता है, दोनों एक दूसरे के बिल्कुल दोस्त जैसे हैं। Laila की माँ का किरदार बहुत ही strong willed और naturally एक लीडर का है, उनके घर मे भी लगभग सभी decisions उसकी माँ के द्वारा ही लिए जाते हैं।

New York पहुँचने पर एक protest के दौरान Laila की मुलाकात Khanum(Sayani) से होती है जो कि एक blind activist है। Khanum पाकिस्तानी-बांग्लादेशी मूल की है। जैसे जैसे इन दोनों की दोस्ती होती है तो Laila को Khanum के करीब आने से अपनी sexuality को और अच्छे से समझने का मौका मिलता है। वो दोनों एक relationship में आ जाते हैं और साथ रहने लगते हैं। पहली बार laila शायद इतनी खुश थी, सब कुछ इतना नया होते हुए भी वो और khanum जैसे अपनी एक छोटी सी खुशहाल दुनिया बसा बैठे थे।

छुट्टियों में दोनों का घर आना होता है दिल्ली इस इरादे से की वो Laila के घर वालों को अपने रिश्ते के बारे में बता देंगे, इसी बीच बहुत कुछ घटता है जो Laila के जीवन के पूरे मायने बदल देता है। दुःख, प्यार, रिश्ते इन सब से गुज़रते हुए laila खुद को नए रूप से discover करती है। वो अपनी गलतियों को accept करती है, पहले जो उसकी एक need थी normal होने का validation लेने की अपने जीवन में, वो धीरे धीरे उससे और self-pity से उभरती है।

अगर जीवन एक margarita है जिसे सब अपने अपने ढँग से पीते हैं तो Laila उसे straw के साथ पीती है। यह उसका तरीका है, यह उसकी margarita है।

फ़िल्म की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें diversity बहुत है फिर चाहे वो locations की हो, कलाकारों की हो या characters और उनके जीवन की परिस्थितियों की। Cinematography भी बहुत सुंदर है, कुछ कुछ scenes जहाँ Laila और Khanum के हाथ मिलते हैं वो बहुत सुंदर हैं।

Kalki ने Laila के किरदार को बहुत ईमानदारी और खूबसूरती से निभाया है, सोचती भी हूँ तो लगता है कि कितनी मेहनत लगी होगी ऐसे व्यक्ति के पूरे हाव भाव और शारीरिक संरचना में खुद को ढालने के लिए। Sayani और Revathi ने भी दिल जीत लिया अपने अभिनय से। फ़िल्म में इन तीनों अभिनेत्रियों ने बहुत ही शानदार किरदार निभाए हैं, शायद यह सब देखकर हम यही कहेंगे कि फ़िल्म बहुत bold है पर मुझे फ़िल्म बहुत natural लगी, इसमें किसी भी प्रकार से किसी भी परिस्थिति या किरदार को जो है उससे ज्यादा दिखाने की कोशिश नहीं करी और ना ही दर्शक को किसी भी किरदार की तरफ़ एक sympathy वाला माहौल महसूस कराया। हर किरदार flawed है, अपने आप में जूझ रहा है और आप बस उनके जीने में एक हिस्सा हो जो सब कुछ देख रहा है।

यह फ़िल्म ज़रूर देखनी चाहिए, बहुत कम होता है कि हम cinema में खासकर Indian Cinema में जीवन को ऐसे किरदारों के नज़रिए से देख पाते हैं और वो भी इतनी खूबसूरती से।

Margarita With a Straw – Youtube Link

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