Raghuvir Sahai- रघुवीर सहाय की TOP 3 कवितायेँ पार्ट -2

Rahuvir Sahai – रघुवीर सहाय जी के बारे में आपको अपने पिछले ब्लॉग में बता चुके थे, अगर अपने अभी तक नहीं पढ़ा है तो यहाँ से पढ़िए पार्ट – 1।  फिर भी उनके बारे में  बता सहाय जी एक प्रशिद्ध लेखक के साथ साथ एक पत्रकार भी रहे थे।  उन्होंने समाज के हर पहलू पर कविता, कहानियाँ, निबंध और नाटक लिखे हैं।  उनकी एक फेमस कविता संग्रह है ” लोग भूल जायेंगे ” जिसे 1984 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था और अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें।


अपराध संगठित, राजनीति संगठित, दमनतंत्र संगठित 
केवल अपराध के विरुद्ध जो कि बोला था अकेला है
उससे कहा है कि हमसे संपर्क करें, गुप्त रहे
हमें उसे पुरस्कार देना है और पुरस्कार को गुप्त नहीं रखेंगे।
मुझसे कहा है कि मृत्यु की ख़बर लिखो :
मुर्दे के घर नहीं जाओ, मरघट जाओ
लाश को भुगतान के नियम, खर्च और कुप्रबंध

-खोज खबर लिख लाओ :
यह तुमने क्या लिखा-“झुर्रियाँ, उनके भीतर छिपे उनके प्रकट
होने के आसार
-आँखों में उदासी-सी एक चीज दिखती है-"
यह तुमने मरने के पहले का वृत्तांत क्यों लिखा ?

इसमें हमें कुछ ज्यादा आपको बताने की  जरूरत नहीं हैं  पर आपकी यानि के जागरूक नागरिक की जो समाज में कुछ बदलाव लाना चाहते है उसकी हालत और समाज के बदलाव में एक जरूरी स्तभ कही जाने वाली मीडिया की हालत साफ़ नज़र आती है।


यह समाज मर रहा है
इसका मरना पहचानो मंत्री
देश ही सब कुछ है
धरती का क्षेत्रफल सब कुछ है
सिकुड़कर सिंहासन भर रह जाये तो भी वह सब कुछ है
राजा ने  कहा - जो राजा प्रजा की दुर्बलता नहीं पहचानता
वह अपने देश को नहीं बचा सकता प्रजा के हाथों से

ऊपर लिखा बड़ा साधारण सा लगता है ना। अब जरा इसको राजनितिक समझ से पढ़िए एक राजा इस देश को अपने ही लोगों से बचने की बात कर रहा है और उसके लिए देश ही सब कुछ और देश का मतलब है उसकी राजगद्दी। ये हमारी राजनीती और राजनेताओं पर एक तमाचा है।


वे हर ज़माने में सफल व्यक्ति होते हैं
जो की पक्ष लेने से पहले तय करते हैं किसको
हत्यारा बताने में लाभ है
यह उन्हें किसी समय तय करना पड़ता है
सिर्फ़ देख लेते हैं की कानून किस समय
सबसे ज्यादा कमज़ोर है
उसी समय मिल कर चिल्लाते हैं चोर चोर  

कहने को तो ये कविता का एक अंश है, पर यह हमारे समाज की भद्दी तस्वीर है, मतलब आप समझो की लोग अपने लाभ के लिए कानून की कमजोरी की फायदा उठाते हैं और वही हमेशा सफल व्यक्ति होते हैं। और उससे भी दुःख की बात ये है न जाने क्यों मुझे ऐसा लगता है कि आप लोग जो इसे पढ़ रहे होंगे तब भी कुछ खास फ़र्क़ नहीं पढ़ रहा होगा इससे क्यूंकि ये इतना आम हो गया है या शायद हमने कर दिया है। 


Note – ये हमारी निजी समझ है से की गयी व्याख्या है जो अलग भी हो सकती है आपसे और जैसा की हम हर बार कहते हैं, आप अपनी व्याख्या या आपका जो भी मत है उसे जाहिर करें हमे बड़ी ख़ुशी होगी। 

Also: 

Raghuvir Sahay की TOP 3  कविताओं  के अंश (पार्ट -1)

Kunwar Narain | कुँवर नारायण | Top 10 सुंदर पंक्तियाँ

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