Samuel Beckett's The Complete Dramatic Works | Truth Beyond Words

Samuel Beckett’s The Complete Dramatic Works | Truth Beyond Words

There is so little one can say, one says it all. All one can. And no truth in it anywhere.

– Samuel Beckett

बहुत सी रातों में अपने मरने का सपना देखा है। पर मरने के ठीक एक पहले हम आँख खोलकर खुद को मृत्यु से बचा लेते हैं। ये इंसान होने की चालाकी है। पर वो एक क्षण जिसमें हम मृत्यु से जीवन के बीच की दूरी पार करते हैं – वो क्षण भरा मिला है निरीह चुप्पी से। हर बार। जहाँ शब्द हमेशा जो कहा जा रहा है उसके आड़े आए हैं। उस एक क्षण में निश्चित मृत्यु का इंतज़ार है पर मृत्यु नहीं। और फिर तुरंत हमें धड़कन महसूस होती है और हम खुश होकर उस एक क्षण को बीती यादों के बक्से में बंद कर देते हैं।

बहुत निजी रातों के निजी क्षणों में हमें याद आती है वो दूरी जो मृत्यु के सपने और जीवन महसूस करने के बीच हमारी सासों के भीतर रह गई थी। और तब हम पूछते हैं – इस सब का मतलब ‘क्या’ है? हम सब ‘कहाँ’ जा रहे हैं?

तो मैंने पढ़ा Samuel Beckett को। मतलब उनकी सारे नाटकों की किताब – Samuel Beckett’s Complete Dramatic Works. जिन्हे नहीं पता कि Samuel Beckett कौन हैं – तो वो Waiting For Godot वाली पोस्ट पढ़ें (अच्छी है वो!)

Waiting For Godot | Play | Game of forever and always

तो Samuel Beckett के सारे नाटक। Samuel Beckett को 1961 में मिला था Nobel Prize – ड्रामा और साहित्य में एक ऐसी बात लिखने का जिसने revolutionize कर दिया था existentialism और absurd राइटिंग को। Samuel Beckett theater of the absurd के सबसे सफल और सबसे प्रसिद्ध लेखक हैं। (जिन Absurdism और Existentialism term जरूर देख लें Wikipedia पर और वहाँ से Albert Camus की philosophy भी..कुछ अलग है वो!!)

तो अब जो सबसे ऊपर वो मृत्यु और जीवन के बीच के दूरी के बारे में लिखा है – वो इनके हर नाटक का सार है। हर नाटक में हमें महसूस होता है कि हम मृत्यु के निकट हैं, उसके आस पास हैं पर ठीक मृत्यु तक नहीं पहुँच पा रहे। हर पात्र एक खेल का हिस्सा है जो बहुत सालों से चला आ रहा है जिसमें मृत्यु एक दिन आएगी का भरोसा हमें मरने नहीं दे रहा, और सारे संबंध उस खेल में सिर्फ आवाज़ें बन कर रह गए हैं। यहाँ तक कि कई बार हम खुद खुद के लिए आवाज़ बन कर रह गए हैं। पर मृत्यु नहीं आती।

Waiting For Godot के बाद के नाटक धीरे धीरे शब्दों से हटकर सिर्फ visual पर रह गए हैं। Samuel Beckett ने बाद के दिनों में कहा था कि मुझे अपने सारे शब्द झूठ लग रहे हैं, तो उन्होंने पूरा एक नाटक बिना एक भी शब्द का लिखा है। और बहुत सुंदर है वो।

लिखाई इतनी सुंदर है कि पात्र के लिए लगता है कि किसी ना किसी क्षण में हम ये पात्र रहे हैं। हर नाटक बात करता है उस खेल की जो हम अपने आस पास देख रहे हैं, जी रहे हैं, सदियों से, जिसके कोई मानी नहीं है, और ठीक उस बिन्दु को छूने से पहले हम पलट जाते हैं जहाँ हमें पता चल सकता है कि किसी भी चीज का कोई अर्थ है क्या?

हमने बहुत बार अपने से और फिर दूसरों से पूछा है जवाब ‘क्या’ और ‘कहाँ’ शब्द का। या तो आधा अधूरा जवाब मिला है या पागल कह दिया गया है और हमने फिर उसे सजा दी है और दूसरे के पास गए हैं यही सवाल लेकर। इस बात पर एक नाटक है।

Words fail, there are times when even they fail.

Samuel Beckett

जब जीवन का सुर गाते गाते थक कर सो जाते हैं तो सपने में हमारी शक्ल का एक आदमी आता है (मानव कौल के एक वाक्य पर आधारित) जो बहुत धीमे से हमारे सर को सहलाता है और फिर चला जाता है। इस बात पर एक नाटक है।

हम खुद से भागकर कहीं दूर चले जाते हैं। और सुनाते हैं खुद को एक कहानी कि एक आदमी रोज हमारे पास आकर कहानी सुनाता है। डर इस बात का ही कि एक दिन कहानी खत्म होगी तब वो आदमी भी चला जाएगा और तब हम अकेले हो जाएंगे। एक नाटक इस बात पर है।

हमारे सारे संबंध हमारे मन में आवाजों के रूप में रहते हैं। बहुत से संबंधों को हमने मन में ही उनका गला घोंटकर मार दिया है। पर कोई ना कोई आवाज बच ही जाती है। क्या हो कि उस आखिरी आवाज को मार दिया जाए? बहुत बार पूछा है ये सवाल। और इस बात पर भी एक नाटक है।

हमें पता है कि मृत्यु एक दिन हमें मिट्टी की तरह ढक लेगी पर हम रोज इस उम्मीद से जीते हैं कि कल खुशियां आएंगी। इस बात पर एक नाटक है।

And you, she says, what’s the idea of you, she says, what are you meant to mean?

सारे नाटक के सारे पात्र शब्दों से जूझ रहे हैं। वो अर्थ तक पहुँचना चाहते पर शब्द उन्हें अंधेरे में धकेल देते हैं। तब क्या बचता है? वो Beckett के नाटक में दिखता है। कुछ ऐसा जो बहुत भीतर जाएगा।

हमने बहुत बार सबसे नजरें चुराई है, भागे हैं सबसे कि कोई देख ना ले। घर के कमरे में शीशे, भगवान, हर वो चीज जो ये महसूस करा सके कि कोई देख रहा है वो हमने नकार दी है। अतीत के फोटो फाड़ दिए कि अतीत नहीं है। हम हैं, सिर्फ हम इस क्षण और हमें देखने वाला कोई नहीं। और खुद से भागने के लिए सो गए आँख मूँद कर। पर हर बार आँख खुलने पर हमने जाना है हम हैं जो खुद को देखते हैं। हमारा होना ही खुद को देखना है – इस खेल से बचा नहीं जा सकता।

तो अगर कुछ कतई अलग और थोड़ा गहरा पढ़ना है तो Samuel Beckett के नाटक पढ़ो। और Waiting For Godot को छोड़ कर बाकी सारे नाटक 3 या 4 पेज़ से ज्यादा के नहीं है। तो अगर लग रहा हो कि हर नाटक बहुत बड़ा है तो गलत हैं – एक नाटक तो 35 सेकंड का है। बाकी सारे ऐसे ही 5 से 10 मिनट के। पर हाँ, पढ़ना तो कम से कम दो बार पढ़ना – एक एक शब्द क्यूंकि Beckett की लिखाई में पता चलेगा – शब्द धोखा देते हैं… आवाज पर ज्यादा  ध्यान दीजिएगा।

Is love the word? Is soul the word? Do we mean love, when we say love? Soul, when we say soul?

Samuel Beckett

तब तक पढ़ते रहिए।

एक फोटोग्राफर हैं John Haynes – उनकी वेबसाईट पर actual में Samuel Beckett के direct किये हुए plays की photos हैं। बहुत surreal। देखो जाके – Link

Samuel Beckett Complete Dramatic Works Quotes

To wit this love what is this love that more than all the cursed deadly or any other of its great movers so moves the soul and soul what is this soul that more than by any of its great movers is by love so moved?

They say, That is not his life, he does not live on that. They don’t see me, they don’t see what my life is, they don’t see what I live on, and they say, That is not his life, he does not live on that.

Also: आधे- अधूरे | मोहन राकेश | नाटक | आधे- अधूरे… हम सब की तरह |

They say, That is not his life, he does not live on that. They don’t see me, they don’t see what my life is, they don’t see what I live on, and they say, That is not his life, he does not live on that.

What he had done alone could not be undone. Nothing he had ever done alone could ever be undone. By him alone.

Hardly a day, without some addition to one’s knowledge however trifling, the addition I mean, provided one takes the pains.

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How can one better magnify the Almighty than by sniggering with him at his little jokes, particularly the poorer ones?

To have been always what I am – and so changed from what I was.

I am the one, I say the one, then the other.

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About Arun Singh

बिखेरने की आज़ादी और समेटने का सुख - लिखने की इससे बेहतर परिभाषा की खोज में निकला एक व्यक्ति। अभिनय से थककर शब्दों के बीच सोने के लिए अलसाया आदमी।

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