Books कहानी हिन्दी

प्रतिनिधि कहानियाँ – निर्मल वर्मा | निजी खिड़कियां

बरसों बाद भी घर, किताबें, कमरे वैसे ही रहते हैं, जैसा तुम छोड़ गए थे; लेकिन लोग? वे उसी दिन से मरने लगते हैं, जिस दिन से अलग हो जाते हैं… मरते नहीं, एक दूसरी ज़िंदगी जीने लगते हैं, जो धीरे- धीरे उस ज़िंदगी का गला घोंट देती है, जो तुमने साथ गुजारी थी…

Books कहानी विचार हिन्दी

Hitchhiker’s Guide to Galaxy | Universe and Every Theory

जैसे ही कोई ये समझ लेगा कि universe क्यूँ बना, इसका काम क्या है – वैसे ही ये वाला universe गायब हो जाएगा और इसकी जगह दूसरा universe आ जाएगा – जो पहले वाले से कई गुना ज्यादा कठिन यानि कि complex और bizarre होगा।
ऊपर वाली theory से related theory है – कि ऐसा कई बार हो चुका है।

Books शेर हिन्दी

मनोज ‘मुंतशिर’ – मेरी फ़ितरत है मस्ताना | Top 10

आपका तो नहीं पता पर ‛ मैं ’ जो बालक ये लिख रहा है वो बिल्कुल ऐसा ही बालक है जैसा इस शेर में है-

कोई खुदगरज़ियाँ देखे हमारे जैसे बच्चों की
अधूरी माँ के होंठों पर कहानी छोड़ दी हमने

निवाले माँ खिलाती थी, तो सौ नखरे दिखाते थे
नहीं है माँ ,तो सारी आनाकानी छोड़ दी हमने

Books review | समीक्षा कहानी हिन्दी

निर्मल वर्मा – हर बारिश में | A surface beneath words

निर्मल वर्मा की एक और चीज बहुत झकझोर देती है – उनका यथार्थ को लेकर नजरिया। यथार्थ और सत्य उनके लिए दो अलग अलग चीज़े हैं और वो convince भी कर देते हैं पढ़ने वाले को यथार्थ समय की एक अलग ही धारा में बहता है जो हमारे निजी जीवन से कुछ भिन्न है। बहुत ही बारीक और खोजबीन वाली नजर से देखेंगे तो जान पाएंगे कि जो हम जी रहे हैं वो यथार्थ से कोसों दूर है। उनके लेखों में यथार्थ की झलक कहीं पर चमकती धूप सी मिलती है।