review | समीक्षा फिल्म

Eeb Allay Ooo! | The Perfect Cinema by Director Prateek Vats

एक सीन में republic day यानि 26 जनवरी की परेड चल रही है। बहुत से बंदर भगाने वाले आस पास हैं जिससे बंदर ना आ जाएँ। और फिर सामने से बंदरों की ही झांकी निकलती है और सब ताली बजाते हैं। ये अपने आप में बहुत ironic है। अंजनी की नजरों से देखने पर हँसी आती है। लेकिन तुरंत कुछ खयाल भी आते हैं।

नौकरी देने से पहले documentary दिखाई जाती है बंदरों पर जिसमे कहा जाता है कि – पहले इंसानों ने इन्हे भगवान का दर्जा दिया। खाने को प्रसाद और दूसरी चीजें दीं। तो इनका हौसला बढ़ गया। इन्हे लगता है कि इन्हे खाना खाने के लिए खाना ढूँढने की जरूरत नहीं है।

Books top 10 कविता हिन्दी

Piyush Mishra – आरंभ है प्रचंड किताब से Top 10 गीत

Piyush Mishra जी को सभी जानते हैं। जिन्होंने भी गुलाल और Gangs of Wasseypur देखी है वो जानते होंगे। वो बहुत ही उम्दा अभिनेता और लेखक हैं। खासकर कविता और गीतों के। उनके गीत आपने जरूर भूले बिसरे गुनगुनाएँ होंगे। चाहें वो आरंभ हो प्रचंड हो या एक बगल में चाँद होगा, एक बगल में…

कविता हिन्दी

Kunwar Narayan – कुँवर नारायण की कुछ और पंक्तियाँ

सविनय निवेदन है प्रभु(राम) कि लौट जाओ
किसी पुराण – किसी धर्मग्रंथ में
सकुशल सपत्नीक…
अबके जंगल वो जंगल नहीं
जिनमें घूमा करते थे वाल्मीक!

top 10 कविता हिन्दी

Kedarnath Agrawal – केदारनाथ अग्रवाल के प्रकृति प्रेम की झलकियां

Kedarnath Agrawal जी की किताब के कुछ अंश आपने पहले पढे थे। जिसमें उनके सामाजिक दृष्टि पैनी होने की झलक साफ दिखती है। केदारनाथ अग्रवाल जी की सामाजिक दृष्टि की झलकियां उसी किताब से कुछ और कविताओं की झलक ये रही जिनमे उनके प्रकृति प्रेम की झलक मिलती है- 1.नदी के किनारे के पत्थरों को…

Books कहानी हिन्दी

नौकर की कमीज – विनोद कुमार शुक्ल | अंश

संघर्ष का दायरा बहुत छोटा था। प्रहार दूर-दूर से और धीरे-धीरे होते थे इसलिए चोट बहुत जोर की नहीं लगती थी। शोषण इतने मामूली तरीके से असर डालता था कि विद्रोह करने की किसी की इच्छा ही नहीं होती थी। या विद्रोह भी बहुत मामूली किस्म का होता। यदि सब्जी बहुत महंगी मिलती थी तो इसका कारण उन सब्जी बेचनेवालों को समझता जो टोकरी में सब्जी बेचने मुहल्ले-मुहल्ले घूमते थे। उनसे सब्जी तौलाते समय डपटकर बोलता – तौल ठीक होना चाहिए। सड़ी आलू मत डाल देना। तुम लोग ठगते हो, डंडी मारते हो, लूटते हो। यही मेरा विद्रोह था।

कविता हिन्दी

Raghuvir Sahai- रघुवीर सहाय की TOP 3 कवितायेँ पार्ट -2

Rahuvir Sahai – रघुवीर सहाय जी के बारे में आपको अपने पिछले ब्लॉग में बता चुके थे, अगर अपने अभी तक नहीं पढ़ा है तो यहाँ से पढ़िए पार्ट – 1।  फिर भी उनके बारे में  बता सहाय जी एक प्रशिद्ध लेखक के साथ साथ एक पत्रकार भी रहे थे।  उन्होंने समाज के हर पहलू…

top 10 कविता हिन्दी

Kunwar Narain | कुँवर नारायण | Top 10 सुंदर पंक्तियाँ

नहीं चाहिए तुम्हारा यह आश्वासन
जो केवल हिंसा से अपने को सिद्ध कर सकता है।
नहीं चाहिए वह विश्वास, जिसकी चरम परिणति हत्या हो।
मैं अपनी अनास्था में अधिक सहिष्णु हूँ।
अपनी नास्तिकता में अधिक धार्मिक।
अपने अकेलेपन में अधिक मुक्त।
अपनी उदासी में अधिक उदार।
– kunwar narain

कविता हिन्दी

Raghuvir Sahay की TOP 3  कविताओं  के अंश (पार्ट -1)

जैसे गरीब पर किसी ताकतवर की मार 
जहाँ कोई कुछ कर नहीं सकता 
उस गरीब के सिवाय 
और वह भी अक्सर हँसता है 
हँसो हँसो जल्दी हँसो 
इसके पहले कि वह चले जायें 
उनसे हाथ मिलाते हुए 
नज़रें नीची किये 
उनको याद दिलाते हुए हँसो 
कि तुम कल भी हँसे थे।