Books कहानी नाटक हिन्दी

तीन एकांत – निर्मल वर्मा | एकांत का सुख है

कभी-कभी मैं सोचती हूँ कि मरने से पहले हममे से हर एक को यह छूट मिलनी चाहिए कि हम अपनी चीर-फाड़ खुद कर सकें। अपने अतीत की तहों को प्याज़ के छिलकों की तरह एक-एक करके उतारते जाएँ – आपको हैरानी होगी कि सब लोग अपना-अपना हिस्सा लेने आ पहुचेंगे, माँ-बाप, दोस्त, पति – सारे छिलके दूसरों के, आखीर की सुखी डंठल आपके हाथ मे रह जाएगी, जो किसी काम की नहीं, जिसे मृत्यु के बाद जला दिया जाता है, या मिट्टी के नीचे दबा दिया जाता है।

Books review | समीक्षा कहानी नाटक हिन्दी

आगरा बाज़ार – हबीब तनवीर साहब की Time Travelling Machine

अदना, गरीब, मुफलिस, जरदार पैरते हैं,
इस आगरे में क्‍या-क्‍या, ऐ यार, पैरते हैं।
जाते हैं उनमें कितने पानी में साफ सोते,
कितनों के हाथ पिंजरे, कितनों के सर पे तोते।
कितने पतंग उड़ाते, कितने मोती पिरोते,
हुक्‍के का दम लगाते, हँस-हँस के शाद होते।
सौ-सौ तरह का कर कर बिस्‍तार पैरते हैं,
इस आगरे में क्‍या-क्‍या, ये यार, पैरते हैं॥