कविता हिन्दी

केदारनाथ अग्रवाल की किसानी कवि होने की झलकियां

नहीं कृष्ण की,
नहीं राम की,
नहीं भीम, सहदेव, नकुल की,
नहीं पार्थ की,
नहीं राव की, नहीं रंक की..
नहीं तेग, तलवार, धर्म की
नहीं किसी की, नहीं किसी की
घरती है केवल किसान की।

top 10 कविता हिन्दी

कुँवर नारायण की Top 10 पंक्तियाँ – Part 3

और वह प्रेमिका
जिसका मुझे पहला धोखा हुआ था
मिल जाए तो उसका खून कर दूँ!
मिलती भी है, मगर
कभी मित्र
कभी माँ
कभी बहन की तरह
तो प्यार का घूंट पीकर रह जाता।

कविता हिन्दी

रघुवीर सहाय की निशब्द कर देनी वाली TOP – 5 कविताओं के अंश

देश पर मैं गर्व करने को कहता हूँ
उनसे जो अमीर हैं बड़े स्कूलों में पढ़े हैं
पर उन्हें गर्व नहीं है
गर्व है भूखे-प्यासे अधपढे लोगों में
राष्ट्रीय गौरव रह गया है अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में
मोहरा बनकर
पड़ोसी को हराने में, यह गर्व मिटता है
यदि पड़ोसी और हमारी जनता की दोस्ती बढ़ती है
बड़े देशों की राजनीति करने के लिए अपनी जनता को
तनाव में रखना पड़ता है

कविता हिन्दी

Kunwar Narayan – कुँवर नारायण की कुछ और पंक्तियाँ

सविनय निवेदन है प्रभु(राम) कि लौट जाओ
किसी पुराण – किसी धर्मग्रंथ में
सकुशल सपत्नीक…
अबके जंगल वो जंगल नहीं
जिनमें घूमा करते थे वाल्मीक!

कविता हिन्दी

Raghuvir Sahai- रघुवीर सहाय की TOP 3 कवितायेँ पार्ट -2

Rahuvir Sahai – रघुवीर सहाय जी के बारे में आपको अपने पिछले ब्लॉग में बता चुके थे, अगर अपने अभी तक नहीं पढ़ा है तो यहाँ से पढ़िए पार्ट – 1।  फिर भी उनके बारे में  बता सहाय जी एक प्रशिद्ध लेखक के साथ साथ एक पत्रकार भी रहे थे।  उन्होंने समाज के हर पहलू…

top 10 कविता हिन्दी

Kunwar Narain | कुँवर नारायण | Top 10 सुंदर पंक्तियाँ

नहीं चाहिए तुम्हारा यह आश्वासन
जो केवल हिंसा से अपने को सिद्ध कर सकता है।
नहीं चाहिए वह विश्वास, जिसकी चरम परिणति हत्या हो।
मैं अपनी अनास्था में अधिक सहिष्णु हूँ।
अपनी नास्तिकता में अधिक धार्मिक।
अपने अकेलेपन में अधिक मुक्त।
अपनी उदासी में अधिक उदार।
– kunwar narain

कविता हिन्दी

Raghuvir Sahay की TOP 3  कविताओं  के अंश (पार्ट -1)

जैसे गरीब पर किसी ताकतवर की मार 
जहाँ कोई कुछ कर नहीं सकता 
उस गरीब के सिवाय 
और वह भी अक्सर हँसता है 
हँसो हँसो जल्दी हँसो 
इसके पहले कि वह चले जायें 
उनसे हाथ मिलाते हुए 
नज़रें नीची किये 
उनको याद दिलाते हुए हँसो 
कि तुम कल भी हँसे थे। 

Books कविता हिन्दी

Kedarnath Singh | केदारनाथ सिंह की कविताओं के अंश

मैं पूरी ताक़त के साथ
शब्दों को फेकना चाहता हूँ आदमी की तरफ
यह जानते हुए कि आदमी का कुछ नहीं होगा
मैं भारी सड़क पर सुनना चाहता हूँ वह धमाका
जो शब्द और आदमी की टक्कर से पैदा होता है
– केदारनाथ सिंह

शेर हिन्दी

इब्ने इंशा के Top 10 शेर | Ibne Insha Top 10

कूचे को तेरे छोड़कर जोगी ही बन जाएँ मगर
जंगल तेरे, पर्बत तेरे, बस्ती तेरी, सहरा तेरा

मैंने ये शेर लगभग एक साल पहले instagram पर कहीं पढ़ा था और तब भी वही अहसास हुआ था जो अभी लिखते हुए हो रहा था। ये प्रेम की अभिव्यक्ति है और बेहद सुंदर।