Books review | समीक्षा top 10 कविता हिन्दी

Gulzar – Triveni | The best among best

हमारे समाज की भद्दी तस्वीर को उज़ागर करता और हम खुद के अंदर झांकने को मजबूर करता है ये त्रिवेणी

चूड़ी के टुकड़े थे, पैर में चुभते ही खून बह निकला
नंगे पाँव खेल रहा था, लड़का अपने आँगन में

बाप ने कल फिर दारू पी के माँ की बाँह मरोड़ी थी।