The Old Man And The Sea | पतझड़ में बसंत!

“But man is not made for defeat. A man can be destroyed but not defeated.”

The Old Man And The Sea (Ernest Hemingway)

आदमी को बर्बाद हो जाना चाहिए लेकिन हार नहीं माननी चाहिए! ये पंक्ति उपन्यास ‘ द ओल्ड मैन एंड द सी ‘ से है जिसे लिखा है अमेरिकी कथाकार अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने। हेमिंग्वे को इस उपन्यास के लिए 1954 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार और 1953 में फ़िक्शन के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार मिला। द ओल्ड मैन एंड द सी एक बेमिसाल हौसले की दास्तां है।

Amerika | Freedom & Theatricality

बुढ़ापा उम्र का एक ऐसा पड़ाव है, जिसमें इंसान की मानसिक और शारीरिक ताक़त क्षीण हो जाती है। मन में किसी बच्चे की तरह उमंगें उठती है पर शरीर साथ छोड़ देता है। इस पर एक बूढ़ा अपाहिज समंदर की गहराइयों में फंसा एक बड़ी शार्क मछली का शिकार करता है और सोचता है । ” आदमी को बर्बाद हो जाना चाहिए लेकिन हार नहीं माननी चाहिए।” हौसला उम्र नहीं देखता । यह ऐसा जज़्बा है, जो इंसान को हारने के बाद टूटने नहीं देता।

“It is good that we do not have to try to kill the sun or the moon or the stars. It is enough to live on the sea and kill our true brothers.”

The Old Man And The Sea (Ernest Hemingway)

The Castle | Have We Reached There, Yet!

बूढ़े आदमी का दिमाग़ अब बिल्कुल स्पष्ट था और वह ख़ुद को बेहतर महसूस कर रहा था। हालांकि उसे उम्मीद कम थी फिर भी वह संकल्पों से भरा था। उसने सोचा , अंत में सब अच्छा होगा। अपने पास की बड़ी शार्क मछली को उसने एक नज़र देखा जिसने उसकी मछली खा ली थी । जिसे हासिल करना उसका सपना था। उसने सोचा इसकी चोट से मैं ख़ुद को बचा तो नहीं सकूंगा। लेकिन इसे हासिल ज़रूर कर लूंगा। उसे शार्क मछली की माँ के लिए अफ़सोस हुआ । शार्क जैसे ही उसके पास आई उसने उस पर हमला किया। शार्क अपनी पूँछ से उसे थपेड़े मारते हुए निकल गई।बूढ़े ने पानी के भीतर मछली की डुबकी लगाने की आवाज़ सुनी । थोड़े ही समय में शार्क का सिर फिर से बाहर आया उसकी बड़ी बड़ी आँखें और खुले हुए मुँह के तीखे दांत चमकने लगे। शार्क के दिमाग़ का यही वह हिस्सा था जहाँ बूढ़े को चोट करनी थी। उसने अपने लहूलुहान हाथों में बरछी लेकर अपनी पूरी ताक़त से वहीं मारा,उसने यह हमला बिना किसी उम्मीद के किया था लेकिन उसके पीछे संकल्प और पूरी दृढ़ता थी। शार्क ऊपर आई । बूढ़े आदमी ने देखा कि अब उसकी आँखों में जीवन नहीं है। शार्क के साथ वह भी उछला , शार्क थपेड़े मारती हुई घायल होकर गिर गई। बूढ़ा जानता था कि शार्क मर चुकी है लेकिन अभी उसकी मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पा रहा था। शार्क अपनी पीठ पटकती है और ऐसे लेट जाती है जैसे जल में नाव तैरती है । जहाँ शार्क का ऊपरी हिस्सा और पेट था वहीं पानी एकदम सफ़ेद था। शार्क धीरे-धीरे नीचे आने लगी बूढ़े ने ज़ोर से कहा ‘ यह 40 पाउंड की होगी! ‘ बूढ़े की अब शार्क को देखने की इच्छा नहीं हो रही थी। जब तक शार्क उस पर हमला कर रही थी तब तक वह लड़ रहा था। लेकिन अब उसे संतोष हो गया कि उसने उसे मार दिया है जिससे वह लड़ रहा था । उसने शार्क जितनी बड़ी मछली पहले कभी नहीं मारी थी । उसके लिए यह सब एक सपने जैसा था । वैसे मैं मछली नहीं फंसा पाता और बिस्तर पर पड़े पड़े अख़बार पढ़ता रहता लेकिन आदमी हारने के लिए नहीं बना है। उसने कहा ‘आदमी को बर्बाद हो जाना चाहिए लेकिन हार नहीं माननी चाहिए।’

“You did not kill the fish only to keep alive and to sell for food, he thought. You killed him for pride and because you are a fisherman. You loved him when he was alive and you loved him after. If you love him, it is not a sin to kill him. Or is it more?”

The Old Man And The Sea (Ernest Hemingway)

शार्क को मारने के बाद वो लगातार द्वंद में जूझता रहा। सहीं ग़लत का फ़ैसला करता रहा। अंत में उसने ख़ुद को समझाया ‘ तुम तो सिर्फ़ ये सोचो कि तुम एक मछुआरे के रूप में पैदा हुए थे और मछली भी मछली के रूप में पैदा हुई थी। सेन पेड्री एक मछुआरा था – जैसे उसका पिता महान डिमागियो एक मछुआरा था।’

उसने सफ़र के अंत तक शार्क से लड़ते हुए एक और शार्क का शिकार किया। हालांकि उसने स्वयं काफ़ी मांस खा लिया था। उसके पास शार्क का सिर शेष रहता है।
बूढ़ा जोश से भर जाता है और उसकी फिर से शिकार करने की अभिलाषा जाग जाती है। उसने पानी में हाथ डाला और तभी सोचा कि दोपहर हो रही है उसको लौटने में देर हो जाएगी। चारो ओर समुद्र और आसमान दिख रहा था। उसे उम्मीद थी कि जल्द वह धरती पर लौट आएगा। इस उम्र और अपाहिज अवस्था में उसने एक ऐसी मछली का शिकार कर लिया था जो उससे पहले किसी ने नहीं किया था।

“If the others heard me talking out loud they would think that I am crazy. But since I am not crazy, I do not care.”

The Old Man And The Sea (Ernest Hemingway)

हाथ में छड़ी , आँखों पर चश्मा , झुकी कमर, — बुज़ुर्ग के नाम पर कुछ ऐसी तस्वीरें हमारे दिमाग़ में आती हैं।असल बुढ़ापा वो है कि आप हौसला खो दें! जार्ज बंर्स भी कहते है ” आप उम्र को बढ़ने से नहीं रोक सकते , लेकिन आपको उम्र के साथ बूढ़ा होने की ज़रूरत नहीं है। ऐसी कुछ मिसालें, जिन्हें पढ़कर आप भी कह उठेंगे’ पतझड़ में भी खिल सकता है बसंत!’

तो कुछ अच्छा पढ़ना है तो The Old Man and the Sea पढिए।

“Now is no time to think of what you do not have. Think of what you can do with what there is.”

The Old Man And The Sea (Ernest Hemingway)

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