The Outsider - Albert Camus | Merssault's Absurdism

All men believe in God, even those who reject Him.
– Albert Camus (The Outsider)

मैंने मानव कौल की कहानियों में The Outsider का ज़िक्र होते हुए देखा था फ़िर मानव कौल के interviews और videos में भी उन्हें इस किताब के बारे में बहुत कुछ कहते हुए सुना। तो फिर क्या था? इसे तो पढ़ना तय ही था उसी समय से। 

किताब की कहानी Mersault नाम के एक आदमी के इर्द गिर्द बुनी हुई है। Mersault अपनी माँ के निधन पर नहीं रोता है, उसे कोई दुख नहीं महसूस होता है और उसकी इस बात को कोई भी नहीं समझ पाता है। पर Mersault ऐसा ही है, उसने कोई नाटक नहीं किया झूठे दुख का यह सोचकर कि लोग क्या कहेंगें की वो क्यूँ नहीं रोया। उसके नहीं रोने का बस इतना सा ही कारण था कि उसे रोना नहीं आया और इस बात की उसे कोई ग्लानि नहीं थी। 

Every man on the earth was under a sentence of death.
– Albert Camus (The Outsider)

किताब को पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि मानो Mersault कोई पात्र नहीं बल्कि एक idea है। एक बेतुका(absurd) विचार है। फ़िर जब Camus की philosophy के बारे में पढ़ा तो यकीन हो गया कि हाँ Mersault एक विचार ही है, एक बेतुका(absurd) विचार। वो हम सब की तरह नैतिकता की किसी धुरी के इर्द गिर्द नहीं घूमता है और ना ही इस बात को छुपाने के लिए कोई झूठा नाटक रचता है। 
 
Mersault की सबसे अच्छी खूबियों में से एक उसकी honesty है  और इस बात का प्रमाण इस वाक्य में मिल जाता है – “A moment later she asked me if I loved her. I said that sort of question had no meaning, really; but I suppose I didn’t.”
Mersault ईश्वर या भगवान में नहीं मानता है परंतु वो अपने अस्तित्व को लेकर उतना ही अटल है जितना की कोई धार्मिक व्यक्ति ईश्वर के अस्तित्व को लेकर अटल होता है। 

And so I learned that familiar paths traced in the dusk of summer evenings may lead as well to prisons as to innocent, untroubled sleep.
– Albert Camus (The Outsider)

मैं अब किताब के बारे में ज़्यादा बात ना करके उसके पीछे की philosophy के बारे में बात करना चाहती हूँ। Albert Camus एक दार्शनिक थे। उन्हें  absurdism की philosophy के सबसे महत्वपूर्ण विचारकों में से एक माना जाता है। उनकी लगभग सभी रचनाएँ इसी मूल philosophy के इर्द गिर्द ही बुनी हुई है। Absurdism की philosophy यह कहती है की भ्रमाण्ड के होने का मूल रूप से कोई कारण नहीं, उसका कोई उद्देश्य नहीं पर इंसान यह जानते हुए भी हमेशा उसके होने में, उसके जीवन में एक उद्देश्य, एक मतलब, एक meaning ढूँढता है। और यह जो द्वंद है इन दोनों बातों के बीच का यही है absurdism of life. 
 
Camus का मानना था की हमें जीवन के इस absurdism को स्वीकार कर लेना चाहिए ठीक वैसे ही जैसे कोई लंबे समय से बीमार व्यक्ति अपनी आने वाली मौत को स्वीकार कर लेता है। परन्तु उनके कहने का मतलब यह नहीं था कि हम निराशा में जीवन जियें बल्कि वो यह समझाना चाह रहे थे कि इस absurdism को स्वीकार करके हम खुद को आज़ाद महसूस करेंगे। हम कोई भी meaning ढूँढने में नहीं लगे रहेंगे और जीवन को बस जिएँगे जैसे भी हम जीना चाहते हैं,  जिस भी तरह से जीना हमें खुश करता है।   

So I learned that even after a single day’s experience of the outside world a man could easily live a hundred years in prison. He’d have laid up enough memories never to be bored.
-Albert Camus (The Outsider)

आधी किताब पढ़ लेने के बाद अचानक से समझ आया कि किताब का नाम “The Outsider” क्यूँ है। Mersault एक absurdist है। उसे भी हमारी तरह ही जीवन की छोटी छोटी चीज़ों में खुशी मिलती है जैसे कि तैरना, गर्मी की शामों में टहलना वगैरह। परंतु एक गलती और अचानक वो हमें समाज के लिए, बाकी सभी “normal” लोगों के लिए एक खतरे के समान प्रतीत होता है सिर्फ़ इसीलिए क्यूँकि वो हम सब से अलग सोचता है। जैसे ही यह बात सबको मालूम पड़ती है सब उसको बदलने की कोशिश करते हैं, उसपर अपने विचार थोपते हैं, मन ही मन हम भले ही उसे अच्छा मानते हों परन्तु अंत में जब वो नहीं बदलता तो हम कायरों की तरह उसे कठघरे में खड़ा करके एक Outsider करार देते हैं। 
 
Mersault और कुछ नहीं Camus के दार्शनिक विचारों का ही एक रूप है। किताब के आखिर के कुछ पन्नों में वो जो बातें कहता है उनको पढ़ के दिमाग में अंदर तक हिला देने वाले विस्फोट होते हैं। उन कुछ पन्नों को मैंने बार बार पढ़ा और जितनी बार पढ़ा उतनी बार लगा कि Mersault की बातें मन में कहीं जाकर जमा होती जा रही हैं एक पहाड़ की तरह, ऐसा पहाड़ जिसपे बैठकर Mersault की तरह जीवन को देखा जा सकता है।

It puzzled me rather why what would count as a good point in an ordinary person should be used against an accused man as an overwhelming proof of his guilt.
– Albert Camus (The Outsider)

और हाँ अगर यह सब पढ़ के आपको लगे कि यह किताब बहुत depressing होगी तो ऐसा बिल्कुल नहीं है, इसका अंत तो मानों जैसे अंदर पड़ी किसी गाँठ को सुलझा देता है और उसकी जगह एक आशा भर देता है।
अंत…
 
P.S. किताब का दूसरा नाम The Stranger भी है। 
 
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Albert Camus – The Outsider – Link

Quotes from The Outsider by Albert Camus

Every man alive was privileged; there was only one class of men, the privileged class.

There’s no idea to which one doesn’t get acclimatized in time.

All normal people, I added as on afterthought, had more or less desired the death of those they loved, at some time or another.

One never changed his way of life; one life was as good as another.

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