Waiting For Godot | Play | Game of forever and always

अगले ही मोड़ पर सब बदल जाएगा का भरोसा थमने नहीं देता। रास्ता हमेशा से सीधा ही रहा है और रहेगा के डर की रात आती है और हम खुद को Godot कल आएगा का झूठ बोलते हैं। पर Godot कभी नहीं आता – वो कुछ नहीं करता पर फिर भी नहीं आता। हम रोज Godot नाम का धोखा खाते हैं और सीधे चलते रहते हैं। सपने में ‘मोड़’ नाम का परिंदा आता है, जो अपने परों से हवा करता है, बादल आते हैं, बारिश होती है, और फिर सपना टूटता है, हम एक ठूंठ हो चुके पेड़ के नीचे बैठे हैं – Godot के इंतज़ार में। हमेशा से। एक दिन हम जाने का निश्चय करते हैं और तभी याद आता है… कि कल Godot आएगा…

Nothing happens, nobody comes, nobody goes, it’s awful!

Godot के आने की जाने कितनी कहानियां हमने बचपन से सुनी हैं!! Godot कुछ भी हो सकता है, कोई भी हो सकता है – ईश्वर, इंसान, मसीहा, एक पल, एक क्षण, एक दिन, एक सुबह, एक शाम, एक किताब, एक बात, एक पत्ती, एक कीड़ा… कुछ भी। कुछ भी ऐसा जो हमारे सदियों पुराने इंतज़ार को खत्म कर देगा, जो हमें यहां से कहीं और ले जाएगा, जो तोड़ देगा ये सारा खेल का चक्र, जहां कुछ नहीं होता – ना कोई आता है, ना कोई जाता है, सब जैसा है वैसा ही रहता है। पर Godot कभी नहीं आता, पर हां, उसके भेजे हुए लोग आते हैं, ये बताने की एक दिन यानी कि कल Godot आएगा। हम पूछते हैं कि Godot कैसा दिखता है, क्या करता है, तुमने देखा है उसे, तुमने बात की है उससे – और सारे जवाब के बाद हम विश्वास करते हैं कि Godot है और वो आकर हमें यहां से बचा लेगा।

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इंतजार में हमें मिलते हैं कुछ लोग – जो एक दूसरे के पूरक हैं, एक दूसरे पर जीते हैं, एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। एक है जो आदेश देता है, एक है जो बात मानता है – कहते हैं, जो आदेश देता है वो कभी बात मानता था और बात मानने वाला कभी आदेश देता था। कहते हैं कभी ईश्वर इस रास्ते पर नंगे पैर चले थे। और ये हमेशा से यही रहा है। Godot के आने के विश्वास की तरह।

“We’ve nothing more to do here.”
“Nor anywhere else.”
“Ah Gogo, don’t go on like that. Tomorrow everything will be better.”

हमारे सामने कुछ बेहद गलत होता है, पर हम आवाज़ उठाते उठाते रुक जाते हैं और कहते हैं Godot आकर सब ठीक कर देगा। हमारे सिवा हमारी मदद कोई नहीं कर सकता का दिन रोज होता है पर Godot आकर सब ठीक करेगा के बादल हमेशा शाम रखते हैं। हम रोज बीते कल का दिन भूलते हैं – बस Godot का इंतज़ार नहीं भूलते।

समय काटने के लिए हम एक दूसरे की चीजें पहनते हैं – टोपी बदलते हैं जिससे सोच बदलती है, जूते बदलते हैं अपनी सहूलियत और आराम के हिसाब से, लेकिन कुछ नया नहीं है, सब किसी आज के सिर और पैर से उतरे हुए हैं… सब खेल है – Godot के इंतजार का खेल।

We always find something, eh Didi, to give us the impression we exist?

खेल से ऊब कर हम सोचते हैं कि चलो मर जाते हैं, पर रस्सी नहीं है का बहाना बना कर रोज खुद को बचा लेते हैं। रस्सी है भी तो जिस पेड़ से लटकना चाहते हैं उसके टूटने का डर हमें आगे नहीं बढ़ने देता। हम फिर पूछते हैं – चले यहां से? जवाब आता है – नहीं, हम Godot का इंतज़ार कर रहे हैं। और हम लंबी आह भरकर पेड़ के नीचे बैठ जाते हैं।

ये सब मेरी कल्पना नहीं एक नाटक है। नाम है Waiting For Godot, लिखा है Samuel Beckett ने। बहुत से लोग इसे दुनिया का सबसे महान नाटक भी कहते हैं। खैर, तो नाटक यही है। Godot नाम के आदमी का इंतज़ार। जो कुछ ऊपर लिखा है, वही सब होता है और उससे कुछ ज्यादा जो लिखा नहीं जा सकता।

We all are born mad. Some remain so.

कुछ बेहद अलग और इतना सटीक और सच है कि सामने सब कुछ होते हुए भी पूरी संभावना है कि हम उसे नजरंदाज कर सकते हैं। ये इस नाटक की खूबसूरती है या कह लो मांग – कि सारी जिम्मेदारी हमारी है, हम इस नाटक को समझने के लिए Godot का इंतज़ार नहीं कर सकते। हमारे पास वो बहाना नहीं है। या बना भी सकते हैं – We humans are very creative!!

और थोड़ा सा नाटक की तरफ interest बढ़ाने के लिए बता दें – ये मानव का कौल बेहद पसंदीदा नाटक है और इससे inspire होकर कह लो या इसकी कही गई बात पर उन्होंने अपना नाटक लिखा है Giving Up On Godot, जो इस साल 16 March को Prithvi Theatre, Mumbai में होने को था। पर उससे पहले Corona आ गया। खैर, उन्होंने कहा है कि ये सब ठीक होने के बाद वो नाटक जरूर करेंगे।

वैसे तो quotes नीचे दिए ही जाएंगे, और अगर कुछ बेहद अलग और खूबसूरत पढ़ने की इच्छा हो तो Waiting For Godot पढिए। You’ll love it.

P.S. Cover photo is taken from a stage production of Waiting for Godot – from website – Ferdia Murphy

Waiting For Godot Quotes

“If we parted? That might be better for us.”
“We’ll hang ourselves tomorrow. Unless Godot comes.”
“And if he comes?”
“We’ll be saved.”

“What do you do when you fall far from help?”
“We wait till we can get up. Then we go on. On!”

It is true that when with folded arms we weigh the pros and cons we are no less a credit to our species. The tiger bounds to the help of his congeners without the least reflection, or else he slinks away into the depths of the thickets. But that is not the question. What are we doing here, that is the question. And we are blessed in this, that we happen to know the answer. Yes, in this immense confusion one thing alone is clear. We are waiting for Godot to come.

“I’m tired! Let’s go.”
“We can’t.”
“Why not?”
“We’re waiting for Godot.”

“We are happy. What do we do now, now that we are happy?”
“Wait for Godot. Things have changed since yesterday.”

To all mankind they were addressed, those cries for help still ringing in our ears! But at this place, at this moment of time, all mankind is us, whether we like it or not. Let us make the most of it, before it is too late!

“I don’t seem to be able…to depart.”
“Such is life.”

“When you seek you hear.”
“You do.”
“That prevents you from finding.”
“It does.”
“That prevents you from thinking.”
“You think all the same.”

“Let us do something, while we have the chance! It is not every day that we are needed. Not indeed that we personally are needed. Others would meet the case equally well, if not better.”

“Help!”
“We’ve arrived.”
“Who are you?”
“We are men.”


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2 Comments

  1. The way you described the play as well as the things we as humans often face in life is beautiful .Indeed the text is an amazing art ,and hope your work will inspire people to go through it.Good job keep it up 😊.