Eugene Ionesco’s The Chairs और धोखा | एक पत्र

Eugene Ionesco’s The Chairs और धोखा | एक पत्र

Eugene Ionesco का नाटक The Chairs पढ़ा सखी।

ऐसा लगा धोखा दिया हो उन्होंने अंत में। पढ़ने के बाद चुप रहा बहुत देर तक। आखिरी के पलो में ऐसा लगा जैसे बहुत कुछ हाथ आया था और एक दम से छूट गया। जीवन के इतना समीप। ऐसा लगा जैसे Godot एक बार फिर आने का वादा करके चला गया और Ionesco वो बच्चा हैं जो पहले बताने आए थे कि Godot आएगा पर फिर झूठ निकला।

The Great Indian Kitchen | The Cinematic Slap | EkChaupal

The Great Indian Kitchen | The Cinematic Slap | EkChaupal

इस फ़िल्म का यह नाम इसीलिए इतना सटीक है। किसी तमाचे सा। लेकिन तमाचा वो जिसे हम पूरी भीड़ में बहुत अकेले कहीं.. घर की दीवारों जैसी सुरक्षा में महसूस करते हैं। जिसकी आवाज़ किसी को सुनाई नहीं देती हमारे सिवा। और इस तमाचे में कोई हिंसा का भाव भी नहीं होता उलटा यह हमें हमारी उन सारी हिंसाओं का एहसास कराता है जो कभी किसी को नहीं दिखीं.. छुपा दीं गयीं एक असहज मुस्कान के पीछे उन औरतों के द्वारा जो हमारे “The Great Indian Kitchen” में खाना पकाती, बर्तन माँझती, मर्दों की झूठन साफ़ करती पाई जाती हैं। वो औरतें  जो अशुद्ध होती हैं। जिनके दिखने से, छू जाने से नाराज़ रहते हैं भगवान और गुस्सा होते हैं असली मर्द।

Devashish Makhija’s Cycle | A Letter

Devashish Makhija’s Cycle | A Letter

इस फिल्म के बाद मैं देवाशीष का शुक्रिया नहीं कहूँगा कि उन्होंने ये फ़िल्म बनाई। मैं बस उनके गले लगकर माफ़ी मांगूंगा कि उन्हें ये फिल्म बनाने की ज़रूरत पड़ी। और जिस ढंग से बनाई है, उसके लिए नमन और शुक्रिया दोनों।

Cheepatakadumpa : फटी आँखें और एक खेल | Devashish Makhija

Cheepatakadumpa : फटी आँखें और एक खेल | Devashish Makhija

लगभग तेईस मिनट की एक शॉर्ट फिल्म है Cheepatakadumpa नाम से देवाशीष मखीजा की। ये देवाशीष मखीजा वहीं हैं जिनने भोंसले बनाई है। आओ मीना, सुपा सीना.. का खेल। खेल ही तो है। फ़िर चारों तरफ़ इतनी चौंकी हुई आँखें क्यूँ? यह निगरानी क्यूँ? क्या है खेल में ऐसा? क्या खेल कोई घेरा है?

Manoj Muntashir Top New Lines | Meri Fitrat Hai Mastana

Manoj Muntashir Top New Lines | Meri Fitrat Hai Mastana

Manoj Muntashir (मनोज मुंतशिर) को कौन नहीं जानता!! तेरी मिट्टी जैसे गाने के बाद उनका नाम शोहरत की बुलंदिया छूने लगा। उनकी किताब आई थी ‘मेरी फितरत है मस्ताना’।

The Myth of Sisyphus – Albert Camus | Reflections

The Myth of Sisyphus – Albert Camus | Reflections

The Myth of Sisyphus एक essay है। Albert Camus ने अपनी Absurdity की philosophy को इस essay में पूरा समझाया है। ये 1942 में आया था और उनकी हर कहानी और उपन्यास से संबंध रखता है। इस essay के जरिए Camus जीवन, उसके अर्थ, उसकी अर्थहीनता, कैसे जीना चाहिए और क्या हो रहा है जैसे बहुत से सवालों के भीतर झाँकते हैं।

Tarkovsky & His Cinema Of Hope | A Conversation

Tarkovsky & His Cinema Of Hope | A Conversation

Andrei Tarkovsky एक Russian filmmaker हैं। इन्हें दुनिया के greatest filmmakers में गिना जाता है। बीते दिनों इनकी फिल्म Solaris, The Steamroller & The Violin, Andrei Rublev, Mirror, Stalker और The Sacrifice देखी हैं और बार बार देखी हैं। उनसे जो कुछ महसूस हुआ है उस पर संवाद।

धुंध से उठती धुन | निर्मल वर्मा की सक्रिय उम्मीद

धुंध से उठती धुन | निर्मल वर्मा की सक्रिय उम्मीद

‘धुंध से उठती धुन’ – निर्मल वर्मा की किताब है। जिसमें उनकी डायरी, उनके यात्रा वृतांत के दौरान लिखी हुई बातें, संस्मरण और बहुत सी चीजों पर एकांत में मंथन है। इस किताब में जिन बातों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, उन्हें समझने की कोशिश में कुछ संवाद।

निर्मल वर्मा के बहाने – एक लेख

निर्मल वर्मा के बहाने – एक लेख

क्या हम कभी भी वैसा लिख पाते हैं जो हमने लिखने से पहले सोचा था कि हम ऐसा लिखेंगे? आखिर हमारा असल लेखन कौन सा होता है – जो हम सोचते वक़्त लिखते हैं या जो हम लिखते वक़्त सच में लिखते हैं? पर इस सवाल का यह जवाब कितना सही है कि असल में दोनों ही अपने अपने समय(क्षणों) का सत्य होते हैं और क्यूँकि सत्य क्षणिक होता है इसलिए दोनों ही अपने होने में पूरे और जीवित होते हैं उस वक़्त।

Dahli – Lallantop’s Documentary is Beyond The Statistics

Dahli – Lallantop’s Documentary is Beyond The Statistics

अचानक मुझे लगा
ख़तरों से सावधान कराते की संकेत-चिह्न में
बदल गई थी डाक्टर की सूरत
और मैं आँकड़ों का काटा
चीख़ता चला जा रहा था
कि हम आँकड़े नहीं आदमी हैं।