दूधनाथ सिंह | युवा खुशबू और अन्य कविताएँ – Review | Part-1

दूधनाथ सिंह | युवा खुशबू और अन्य कविताएँ – Review | Part-1

उसने मेरी आँखों में छिपी वह गहरी दरार देख ली और अंदर प्रवेश कर गई।
– कविता – युवा खुशबू

अनुवाद | Translation | Pablo Neruda

अनुवाद | Translation | Pablo Neruda

“रात की चिड़िया सबसे पहले
उन सितारों को
चुगती है,
जो मेरी आत्मा से फूटते हैं,
जब जब मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। “

बाल्टी | मानव कौल

बाल्टी | मानव कौल

वक्त बीतते-बीतते निचोड़ता चलता है एक बाल्टी तुमको। बाहर आँगन में जो कपड़े सूख रहे हैं-मेरे पुराने कपड़े-वे तुम्हारी याद का पानी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। कुछ पुराने कपड़े जो वड़ी कोशिशों के बाद सुखा चुका है, वे भी बड़े जिद्दी निकले।