नाटक में जीवन कैसा होना चाहिए?

नाटक में जीवन कैसा होना चाहिए?

जीवित पात्र! नाटक में जीवन जैसा है वैसा नहीं बल्कि ‘जैसा होना चाहिए’ वैसा दिखाना होता है; सपनों वाला जीवन।