Tarkovsky & His Cinema Of Hope | A Conversation

Tarkovsky & His Cinema Of Hope | A Conversation

Andrei Tarkovsky एक Russian filmmaker हैं। इन्हें दुनिया के greatest filmmakers में गिना जाता है। बीते दिनों इनकी फिल्म Solaris, The Steamroller & The Violin, Andrei Rublev, Mirror, Stalker और The Sacrifice देखी हैं और बार बार देखी हैं। उनसे जो कुछ महसूस हुआ है उस पर संवाद।

In The Mood For Love | Something Beyond Words

In The Mood For Love | Something Beyond Words

हम संवादों के पीछे पागल हैं। इस कदर पागल कि उसमें जरा सी भी चुप्पी की गुंजाईश दिखते ही घुटन की भविष्यवाणी कर कोई ना कोई निरर्थक शब्द को बीच में ले आकर खुद को बचा लेते हैं। लेकिन अक्सर, नहीं बहुत बार असल संवाद शब्दों से परे होता है। उन उठती, पड़ोस से गुजरती, टटोलती निगाहों में जितना खुद के छुए जाने का सुख है वो शब्दों में नहीं मिल पाता। और अक्सर शब्द झूठा कर देते हैं उस बात को जो हम कहना चाहते हैं।

Bhonsle | मेरे लिए क्या है!

Bhonsle | मेरे लिए क्या है!

चारों तरफ गूँजता नफ़रत का शोर, उस शोर के नशे में डूब चुके लोग और इन सब के बीच मौन बैठी एक बूढ़ी जर्जर होती देह जो सूनी आँखों से यह सब देख रही है। वो भोंसले है, परंतु भोंसले कौन है? मेरे लिए तो भोंसले जवान होती नफ़रत और हिंसा के बीच बूढ़ी होती हमारी मनुष्यता है, हमारी आत्मा है। जिससे हम आँखें नहीं मिला पाते हैं, जिसकी आँखों में देख मानो हम खुद की मर चुकी आत्मा को आईने में देख लेते हैं।

Dekalog : Krzysztof Kieślowski | Life Changing, Mesmerizing, Otherworldy

Dekalog : Krzysztof Kieślowski | Life Changing, Mesmerizing, Otherworldy

चुप्पी का सबसे सुंदर रूप सोचो : फिर सोचो कुछ उससे भी ज्यादा सुंदर : सोचो, हर व्यक्ति सवालों के घेरे में लड़कर जीता है : जानो, चक्रव्यूह में फंसा अभिमन्यु सिर्फ महाभारत में ही नहीं होता: हर कोई अभिमन्यु है अपने जीवन का : ईश्वर रणभूमि में होकर भी तुम्हारे युद्ध में हस्तछेप नहीं करते : वो बस देखते हैं तुम्हारी कर्मठता और तुम्हारे चुनाव।

Bhonsle | This film is about us

Bhonsle | This film is about us

बहुत सुंदर और बहुत जरूरी फिल्म है – भोंसले। शुरुआत में धीमी लग सकती है अगर ऐसे सिनेमा की आदत नहीं है पर तब भी प्लीज देखो- ये फिल्म आने वाले सालों में जो भीतर कुरेदेगी वो बेहद जरूरी है। और हाँ फिल्म देखते हुए घुटन महसूस होगी क्यूंकि director ने cinematography का use intentionally वैसा किया है।

Capernaum | Morsel of Struggle & Hope

Capernaum | Morsel of Struggle & Hope

Capernaum 2018 की एक Lebanese फिल्म है। जिसको डायरेक्ट किया है Nadine Labaki ने। Capernaum को Cannes Film Festival में 15 मिनट का standing ovation मिला था और ये अब तक की सबसे ज्यादा पैसे कमाने वाली Arabic फिल्म है। फिल्म में 12 साल के Syrian refugee child actor Zain Al Rafeea ने काम किया है। 

Nine: Dreams, Fiction, Reality and The Magic of Cinema

Nine: Dreams, Fiction, Reality and The Magic of Cinema

कुछ दिन होते हैं जब हम ये pinpoint नहीं कर पाते कि ये सपना है या हक़ीक़त। पूरा दिन ऐसा लगता है कि सपना है। सपने और असल जीववन के बीच की लकीर धूमिल (blurred) पड़ जाती है। और अगर ये कोई film बहुत भीतर तक महसूस करवा दे तो?

The Social Network | Engaging & Inspiring

The Social Network | Engaging & Inspiring

फिल्म Social Network based है Mark Zuckerberg की ज़िंदगी पर। Mark ज़ुककेरबर्ग – जो facebook के मालिक हैं। लेकिन facebook बनाने से पहले वो एक Harvard University student थे, जिनके पास बिल्कुल पैसे नहीं होते थे।

एक साधारण ordinary student से एक extraordinary developer की यात्रा है फिल्म Social Network.

फिल्म में जो एक साधारण common man से लेकर एक uncommon man का पात्र है – वो अपनी तरफ खींचे रखता है, और facebook की ज़िंदगी में हमें बांध कर रखता है।

The Birds – Alfred Hitchcock At His Best

The Birds – Alfred Hitchcock At His Best

Alfred Hitchcock एक ऐसे director हैं जो किसी भी व्यक्ति, वस्तु, पक्षी और जो कुछ भी सोच पाओ – कुछ भी मतलब कुछ भी – किसी भी चीज से thrill create कर सकते हैं। It can be seen in The Birds.

The Birds 1963 की फिल्म है और ये भी Alfred Hitchcock की किसी भी चीज से thrill create करने के कला के बारे में कहानी कहती है। 

Eeb Allay Ooo! | The Perfect Cinema by Director Prateek Vats

Eeb Allay Ooo! | The Perfect Cinema by Director Prateek Vats

एक सीन में republic day यानि 26 जनवरी की परेड चल रही है। बहुत से बंदर भगाने वाले आस पास हैं जिससे बंदर ना आ जाएँ। और फिर सामने से बंदरों की ही झांकी निकलती है और सब ताली बजाते हैं। ये अपने आप में बहुत ironic है। अंजनी की नजरों से देखने पर हँसी आती है। लेकिन तुरंत कुछ खयाल भी आते हैं।

नौकरी देने से पहले documentary दिखाई जाती है बंदरों पर जिसमे कहा जाता है कि – पहले इंसानों ने इन्हे भगवान का दर्जा दिया। खाने को प्रसाद और दूसरी चीजें दीं। तो इनका हौसला बढ़ गया। इन्हे लगता है कि इन्हे खाना खाने के लिए खाना ढूँढने की जरूरत नहीं है।