Kunwar Narain | कुँवर नारायण | Top 10 सुंदर पंक्तियाँ

Kunwar Narain | कुँवर नारायण | Top 10 सुंदर पंक्तियाँ

नहीं चाहिए तुम्हारा यह आश्वासन
जो केवल हिंसा से अपने को सिद्ध कर सकता है।
नहीं चाहिए वह विश्वास, जिसकी चरम परिणति हत्या हो।
मैं अपनी अनास्था में अधिक सहिष्णु हूँ।
अपनी नास्तिकता में अधिक धार्मिक।
अपने अकेलेपन में अधिक मुक्त।
अपनी उदासी में अधिक उदार।
– kunwar narain

Kedarnath Singh | केदारनाथ सिंह की कविताओं के अंश

Kedarnath Singh | केदारनाथ सिंह की कविताओं के अंश

मैं पूरी ताक़त के साथ
शब्दों को फेकना चाहता हूँ आदमी की तरफ
यह जानते हुए कि आदमी का कुछ नहीं होगा
मैं भारी सड़क पर सुनना चाहता हूँ वह धमाका
जो शब्द और आदमी की टक्कर से पैदा होता है
– केदारनाथ सिंह

मनोज ‘मुंतशिर’ के top 10 शेर | Top 10

मनोज ‘मुंतशिर’ के top 10 शेर | Top 10

अम्बर की हवाखोरियाँ सब भूल जायेगा,
ये चाँद उतर के जो मेरे कोठों तक आये
प्यासा हुआ तो क्या हुआ खुद्दार बहुत हूँ
दरिया से कहो चल के मेरे होंठों तक आये

विनोद कुमार शुक्ल- कविता से लंबी कविता | Review | Top 10 बिम्ब

विनोद कुमार शुक्ल- कविता से लंबी कविता | Review | Top 10 बिम्ब

पाँच मिनट बाद खिड़की खोलने पर
वही खड़ा हुआ दृश्य,
खड़े हुए दृश्य में
गुजरते हुए लोग
कि उस पेड़ के पास
अब कोई आदमी नहीं
जैसे वह जान-बूझकर पेड़ छोड़कर
चला गया कहीं

बशीर बद्र जी के Top 10 शेर | The Top 10

बशीर बद्र जी के Top 10 शेर | The Top 10

बशीर बद्र साहब इस सदी के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले शायरों में से एक है। बद्र साहब अपने सरल लहजे में बहुत उम्दा बात कहने और उन्हें ग़ज़ल के गहनों से सजाने के लिए मशहूर है। बद्र साहब बहुत तरह के अवॉर्ड से सम्मानित भी किए जा चुके है। किसी भी नए शायर को बद्र साहब को जरूर पढ़ना चाहिए।

दूधनाथ सिंह | युवा खुशबू और अन्य कविताएँ – Review | Part-2

दूधनाथ सिंह | युवा खुशबू और अन्य कविताएँ – Review | Part-2

अमर मैं रहूँगा तो बार-बार मरूँगा।
-कविता – चलूँगा

दूधनाथ सिंह | युवा खुशबू और अन्य कविताएँ – Review | Part-1

दूधनाथ सिंह | युवा खुशबू और अन्य कविताएँ – Review | Part-1

उसने मेरी आँखों में छिपी वह गहरी दरार देख ली और अंदर प्रवेश कर गई।
– कविता – युवा खुशबू

बाल्टी | मानव कौल

बाल्टी | मानव कौल

वक्त बीतते-बीतते निचोड़ता चलता है एक बाल्टी तुमको। बाहर आँगन में जो कपड़े सूख रहे हैं-मेरे पुराने कपड़े-वे तुम्हारी याद का पानी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। कुछ पुराने कपड़े जो वड़ी कोशिशों के बाद सुखा चुका है, वे भी बड़े जिद्दी निकले।