The Myth of Sisyphus - Albert Camus | Reflections

The Myth of Sisyphus एक essay है। Albert Camus ने अपनी Absurdity की philosophy को इस essay में पूरा समझाया है। ये 1942 में आया था और उनकी हर कहानी और उपन्यास से संबंध रखता है। इस essay के जरिए Camus जीवन, उसके अर्थ, उसकी अर्थहीनता, कैसे जीना चाहिए और क्या हो रहा है जैसे बहुत से सवालों के भीतर झाँकते हैं।

“We get into the habit of living before acquiring the habit of thinking.”

Albert Camus (The Myth of Sisyphus)

ओके। गहरी सांस। ये कुछ बवाल पढ़ा है। जाने कितनी बार किताब रख दी एक दो चैप्टर पढ़ने के बाद। और अच्छा रहा। मुझे लगता है, हर चीज का समय होता है। हर किताब का समय होता है। ये किताब सही समय पर मिली। Myth of Sisyphus essay है Absurdity और Suicide के thought पर। जो शुरू तो इस सवाल से होता है कि suicide का thought आता कहाँ से है पर end एक ऐसे बिन्दु पर होता है कि दुनिया पलट जाती है।

मैं ये नहीं कहूँगा मुझे बहुत कुछ समझ आ गया या फिर कुछ भी समझ नहीं आया। क्यूंकि thought is actually absurd तो कहने से क्या ही फरक पड़ता है। दूसरा, बस इतना कि सवाल और clear हुए हैं। जवाब का पता नहीं। (absurd है ना!!)

“A world that can be explained even with bad reasons is a familiar world. But, on the other hand, in a universe suddenly divested of illusions and lights, man feels an alien, a stranger.”

Albert Camus (The Myth of Sisyphus)


तो Camus बहुत आसानी से शुरू करते हैं कि भईया, जब एक इंसान को absurdity का पता चलता है कि असल में किसी चीज का कोई meaning नहीं है और everything is a contradiction, तब suicide का पहला thought originate होता है क्यूंकि तब जीवित रहने के अर्थहीन होने का आभास होता है। तब दो रस्ते हैं – either you accept the absurd or negate it. लेकिन क्यूंकि तुमने absurd को देख लिया है तुम negate नहीं कर सकते, और accept करने के लिए तुम्हें मानना पड़ेगा कि किसी चीज का कोई meaning नहीं है। और अगर meaning नहीं है तो करें क्या?

फिर वो दूसरे philosophers को देखते हैं कि उन्होंने इस बारे में क्या कहा। God, question of self, identity, ये संसार, everything is truth, freedom और सब कुछ। सबसे अच्छी बात, वो एक एक step आगे बढ़ते हैं। एक step को logically define और question करने के बाद दूसरे पर। अच्छी बात ये है कि वो कोई solution थोप नहीं रहे, सिर्फ उजागर कर रहे हैं।

“It is probably true that a man remains forever unknown to us and that there is in him something irreducible that escapes us. “

Albert Camus (The Myth of Sisyphus)



और अंत में है Myth of Sisyphus. संक्षेप में, Sisyphus एक ग्रीक character है जिसे अनंत काल तक एक पत्थर नीचे मैदान से ऊपर पहाड़ तक धकेलने की सजा मिली है। अब होता ये है कि जैसे ही पत्थर थोड़ा ऊपर पहुंचता है, gravity कि वजह से वो नीचे मैदान में लुढ़क जाता है, और Sisyphus को नीचे आना पड़ता है उसे उठाने। Camus कहते हैं कि उनके लिए interesting ये है कि जैसे ही पत्थर ऊपर से नीचे आता है और Sisyphus पलट कर नीचे देखता है, उसके मन में क्या आता होगा?

अब सोचो, एक इंसान जिसे रोज पत्थर नीचे से ऊपर लाना है। कोई अर्थ नहीं है। क्यूंकि यही है बस। इससे कुछ मिलना नहीं। बस यही है। वो नीचे देख रहा है। उसके मन में पहले despair आता है कि अनंत काल तक यही करना है। फिर नीचे जाकर पत्थर को ऊपर लाना है। वो नीचे बढ़ता है। उसके चेहरे पर घृणा है। पर जैसे जैसे वो पत्थर के पड़ोस पहुंचता है वो खुश हो जाता है कि अनंत काल तक उसे यही करना है, बिना किसी आशा के। वो उस momentary truth में सुख ढूंढ लेता है। कि क्यूंकि किसी चीज का कोई अर्थ नहीं है तो वो अभी जो हो रहा है उसमें सुख ढूंढेगा।

“This heart within me I can feel, and I judge that it exists. This world I can touch, and I likewise judge that it exists. There ends all my knowledge, and the rest is a construction. For if I try to seize this self of which I feel sure, if I try to define and to summarize it, it is nothing but water slipping through my fingers.”

Albert Camus (The Myth of Sisyphus)



इसको लाइफ से रीलैट करें? हम रोज उठते हैं जानते हुए कि एक दिन मृत्यु आएगी। कुछ नहीं बचेगा। किसी चीज का कोई अर्थ नहीं है। फिर भी हम आशा में जीते हैं? तो करें क्या? हर कोई इस सवाल का जवाब अपने आप से देता है।

ज्यादा नहीं कह सकता क्यूंकि ज्यादा समझा नहीं हूँ, या कह लो बस सवाल हैं। और बाकी reflections. सिर्फ इतना कि ये किताब पढ़ो। नीचे लिखी बातें मेरे खुद के reflections हैं जो पढ़ते हुए महसूस हुए। उसके नीचे कुछ पसंदीदा quotes हैं। 

“Properly speaking nothing has been experienced but what has been lived and made conscious.”

Albert Camus (The Myth of Sisyphus)

Reflections

Boredom from the habit of living propelled him to an exciting act called suicide…

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वो रोज आशा की तरफ कल के जूते पहन के बढ़ता। एक दिन आशा की खोज खत्म हो गई, पर उसे कल के जूते की आदत हो गई थी। अब आगे बढ़ने पर जूता काटने लगा। अब दो रास्ते सामने थे – या तो जूता फेका जाए, या फिर नंगे पैर अभी के बल चला जाए। अभी के बल चलने में आज के कंकड़ थे। क्या चुने? नई आशा?

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– सखी, अगर हम कहें सब सच है। तो?
– विस्मय, तो जो झूठ है वो भी सच हुआ।
– और अगर सब झूठ है तो?
– तो सच भी झूठ।
– अंतर कहां से बनेगा?
– दिमाग से।
– दिमाग असल में विचार है।
– क्या विचार सच है? या झूठ?? ये तो हर पल बदलता है ना?
– ये एब्सर्ड है।

दोनों हंसने लग जाते हैं।

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आशा, मृत्यु की बहन है।

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“All things are not explained by one thing but all things.”

Albert Camus (The Myth of Sisyphus)

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Carrara नाम का एक कैदी था जो अंत में अपने महल में शैतान को आवाज देता हुआ दौड़ा कि मुझे मृत्यु दे दो।

एक विद्रोही के संसार में, मृत्यु अन्याय से बेहतर है। –

क्या ये डरावना और घिनौना नहीं है कि कोई किसी को ऐसे कैद करता है कि दूसरा मृत्यु को उसके बनाए संसार से पहले चुनता है। क्या इसमें जिसने कैद किया है उसकी हार नहीं है? जिस सरकार के अंदर कोई मृत्यु को जीने और लड़ने से पहले चुने, क्या ये भयावह नहीं कि ये हार है? पर क्योंकि मृत्यु का अर्थ नहीं है तो इस हार का क्या किया जाए? पर साथ में विरोधाभास ये है कि जिसने मृत्यु को चुना वो उसका विद्रोह था। हम किसी के चुनाव पर सवाल लगाने वाले कौन होते हैं?

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इटली में बहुत पहले जब किसी को फांसी देनी होती थी तो priest उसके सामने पेंटिंग रख देते थे। जैसे ही कैदी पेंटिंग में डूब जाता था उसके सिर पर कपड़ा डाल देते थे। ये इसलिए था कि उसे आने वाली मृत्यु का आभास न हो। क्या ये हम अपने साथ नहीं कर रहे? हमने अपने चारों तरफ ऐसे पर्दों का अंबार लगा रखा है जो हमें मृत्यु देखने नहीं देते जबकि हमें पता है मृत्यु आनी है। ये विरोधाभास है, जो जानते हो उसे नकारना और नकारना भी ऐसे कि या तो खुद छिप गए या उससे बेखबर होने के रास्ते बना लिए।

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“Living is keeping the absurd alive. Keeping it alive is above all contemplating it.”

Albert Camus (The Myth of Sisyphus)

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No belief
Away from all certainty lies the truth
What constitutes the truth
I question and find
Lots of small lies
Which means nothing
And I smile
Knowing it is futile to ask the meaning
And it is worthwhile to live the most.

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I reflect upon myself & understand nothing. I smile knowing nothing is actually vast & never-ending but it’s something in itself.

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हम ये नहीं देखते कि कल की आशा में हम उस बिन्दु पर पहुँच रहे हैं जब आशा बचेगी ही नहीं? क्या
ये नहीं कहा जा सकता कि कल का होना मृत्यु का होना है?

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“If the world were clear, art would not exist.”

Albert Camus (The Myth of Sisyphus)

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Truth exists for itself irrespective of its reason.

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जो दिख रहा है वो असल की छाया है, असल छाया के परदे के कहीं बहुत भीतर छिपा बैठ है।

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जितना पानी पियोगे, प्यास उतनी ही बढ़ेगी।

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“Expression begins where the thought ends.”

Albert Camus (The Myth of Sisyphus)



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हम खोने और पाने की परिधि पर खड़े रहकर पूरा जीवन जीते हैं।

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कामू सवाल करते हैं कि हमारी freedom की डेफनिशन क्या है? क्या हम असल में फ्री हैं? वो कहते हैं
कि मैं किसी इंसान की freedom को contemplate नहीं कर सकता। मैं सिर्फ अपनी फ्रीडम से वास्ता रखता हूँ। लेकिन असल में मेरी freedom नकली है। क्यूंकि हम आशा से बंधे हुए हैं। आशा – कल की। जबकि कल एक भ्रम है। तो हम एक भ्रम के गुलाम हैं। और जिस दिन हम कल के भ्रम की सच्चाई जान लेते हैं हमें absurdity का पता चलता है। और तब आता है कि हम freedom में भी absurdity के गुलाम हैं। तो असली freedom कहाँ हैं? या है भी? Can someone live tied to nothing? Even a non-believer is tied to his/her negation of belief.

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अपने ही सच को झूठ मानकर उसकी खोज – absurd.

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माया को समझने के लिए तुम्हें माया से दूर जाना पड़ेगा। माया को माया कहकर उसकी सत्य को नकारकर
ही हम उसके असल सत्य तक पहुँच सकते हैं।

झूठ का सच – झूठ होगा या सच?

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The consciousness of consciousness is an absurdity.

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हमारा दिमाग विस्तार को बांध कर एक बिन्दु पर समेटना चाहता है। सारे का जवाब एक में? The ultimate answer to the infinite question? इसे थोड़ा दूर से देखते हैं – we want to conclude mutliplicity into singularity. Isn’t this the example of absurdity???

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“Art and nothing but art, we have art in order not to die of the truth.”

Nietzsche

 

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