कहानी निबंध परिधि पर

Adhuri Chizon Ka Devta – Geet Chaturvedi | The Third Eye of the Poet

‘अधूरी चीजों का देवता’ गीत चतुर्वेदी की किताब है जो 2020 के दिसम्बर में प्रकाशित हुई थी। इसमें उनके निबंध हैं – कला, कविता, जीवन, प्रेम, लेखन, फिल्म और बहुत कुछ पर। और कुछ डायरी के अंश हैं। उस किताब में जिन बातों से प्रभावित हुए हैं उन पर कुछ संवाद।

फिल्म

The Truman Show | Running From Eternity

मन काफी समय से किसी अस्थिर अणु की भाँति इधर उधर फुदक रहा था.. बहुत समय से कुछ अच्छा पढ़ा या देखा नहीं था। पढ़ने के अनुकूल वातावरण था नहीं तो कुछ देखने का निश्चय किया। “The Truman Show” देखनी है यह यह बात दिमाग में चिपकी पड़ी थी तो बैठ गई देखने। मुख्य किरदार “Jim Carrey” निभा रहे हैं इस बात से वाकिफ़ थी। इनको “The Mask” और “Liar Liar” जैसी बेहतरीन हास्य फिल्मों में देखा था पहले। यह फ़िल्म 1998 में आई थी और इसे देखने के बाद बस एक ही बात मन में आयी की यह फ़िल्म सच में जीवन में मरने से पहले एक बार तो देख ही लेनी चाहिए।

कहानी

निठल्ले की डायरी – हरिशंकर परसाई | निठल्ले – निठल्ले में फ़र्क है!

जब तक पुरुष नारी को यह ना बता दे कि मैं जंगली जानवर भी हूँ, तब तक वह समझता है कि मेरी पूरी शख्सियत नहीं उभरी।

फिल्म

Margarita With A Straw | If life is a Margarita, how will you drink it?

इस फ़िल्म में मेरी तीन सबसे प्रिय अभिनेत्रियाँ हैं जिन्होंने बहुत अहम किरदार निभाए हैं- Kalki Keochlin, Sayani Gupta, Revathi. कहानी Laila(Kalki) की ज़िंदगी की है जो कि Cerebral Palsy से ग्रसित है। उसके परिवार में उसके पिता, उसकी माँ(Revathi) और उसका भाई भी है। Laila दिल्ली में college पढ़ती है, उसे music बहुत पसंद है और वो अपने college के music band में lyricist का काम भी करती है।

कहानी

Letters To Felice | Franz Kafka

पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि मुझसे कुछ छीन लिया गया है। कुछ बेहद निजी। इतने दिनों से कोई था जो साथ था और वो एक दम से किसी ने छीन लिया है या बिना बताए चला गया है। इतना खाली, इतना दुख हुआ कि बहुत देर हाथों को देखता रहा। इतनी निजी बातें पढ़ने का guilt, फिर अंत में कुछ भी हाथ ना आने का अहसास, और उसके बाद इतना कुछ मिल गया का सुख – और इन सबके बाद भी – इतना human कुछ पढ़ने की झुरझुरी अभी भी शरीर पर महसूस हो रही है। कितना कुछ लिखा जा सकता है इस बारे में पर हमारे शब्द कितने झूठे है। हमारा कुछ लिखना, एक भी शब्द कितना थोथला है और ये लिखते लिखते – ये कितना निरर्थक है। कितना झूठ है मेरा खुद को देखना इसके comparison में।

कहानी

Aphorisms by Kafka | Truth Bombs!

From a certain point on, there is no more turning back. That is the point that must be reached. Franz Kafka (Aphorisms) मुझे बहुत पसंद है जब मैं सुबह उठुं और कुछ भी करने से पहले मेरे मन में हो कि यार वो किताब complete करनी है। जो किताबें बांध कर रख पाएं – उनका…

फिल्म

The Social Dilemma | Why Should You Watch It Right Now?

“The social Dilemma” 2020 में बनी एक वृतचित्र है यानी कि एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म है। इसे जेफ ओरलोवस्की ने डायरेक्ट करा है और यह नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है। जैसा कि फ़िल्म के नाम से ही पता चलता है यह फ़िल्म सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और उनसे जुड़े हमारे Dilemma पर बात करती है।

फिल्म

I’m Thinking of Ending Things | It will blow your mind!!

तो भाईसाब, ये जो पिक्चर है I’m Thinking of Ending Things – ये दिमाग खोल देगी। इमेजिनेशन, कहानी, डायरेक्शन, एक्टिंग, सिनेमेटोग्राफी, meaning, relatibility, बातें, absurdity, life, loneliness, continuos shots, human, creativity और ना जाने किन किन मामलों में।

फिल्म हिन्दी

Revolutionary Road | Dreams, Life & Them

फ़िल्म को देख मन में कितनी ही बार यह सवाल आता है कि क्या सच में हमारे खालीपन और निराशा से भागा जा सकता है? और अगर हम भाग भी लेते हैं तो जहाँ ठहरेंगे वहाँ खालीपन और निराशा नहीं होगी यह बात कितनी निश्चितता से कही जा सकती है। यह सब सोचते हुए मानव कौल की लिखी एक बात भीतर कहीं गूँजने लगती है “किसी के चुनते ही जो नहीं चुना वह दिमाग में रह जाता है और जो चुन लिया वह हमारे थके हुए जीवन का हिस्सा बन जाता है।”